क्लीन गंगा के लिए जर्मनी से उत्तराखंड को जल्द ही 1150 करोड़ का बजट मिलने जा रहा है। जर्मनी अपने कॉपरेशन बैंक के मार्फत उत्तराखंड को यह लोन उपलब्ध कराने जा रहा है।
इस राशि से गंगा और सहायक नदियों से जुड़े पांच शहरों हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, मसूरी और तपोवन में सीवरेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। अपने यहां राइन नदी पर शानदार काम करने वाला जर्मनी उत्तराखंड को इस काम में तकनीकी मदद भी देगा। 31 दिसंबर 2017 से पहले जर्मनी के साथ करार पर हस्ताक्षर होने हैं।
गंगा और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण से बचाने के इस महत्वाकांक्षी अभियान की मंजूरी इनवायरमेंट फ्रैंडली अरबन डेवलपमेंट इन गंगा स्टेट के तहत मिली है। गंगा सफाई के समान उद्देश्य के बावजूद यह कार्यक्रम नमामि गंगे से एकदम अलग चलेगा।
पेयजल विभाग का दावा है कि इस अभियान के बाद इन पांच शहरों में सीवरेज सिस्टम के नाम पर एक भी पैसा देने की आवश्यकता नहीं पडे़गी। इस कार्यक्रम के संबंध में 22 सितंबर 2017 को दिल्ली में जर्मनी, भारत और उत्तराखंड सरकार के अफसरों के बीच अहम मीटिंग हो चुकी है। इस मीटिंग के बाद अब द्विपक्षीय करार करने की तैयारी है।
किस शहर को कितना बजट
स्थान लागत
हरिद्वार - 566.83
ऋषिकेश - 342.92
मसूरी - 59.14
देहरादून - 181.00
तपोवन - 0.50
(राशि करोड़ रुपये में)
कहां कितना काम बाकी
पहले गंगा एक्शन प्लान, फिर गंगा रिवर बेसिन अॅथारिटी और अब नमामि गंगे। गंगा और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कई अभियान चले हैं। इसके तहत, सबसे ज्यादा जिस काम पर फोकस किया गया है, वह गंदे नालों की टेपिंग से संबंधित है।
सीवरेज सिस्टम विकसित करके गंदे नालों को गंगा और उसकी सहायक नदियों में आने से रोकने के प्रयास अब भी जारी है। कई सालों बाद भी सीवरेज सिस्टम की इन पांच शहरों में हालत परखें, तो पता चलता है कि 20 से 30 फीसदी काम होना बाकी है। हरिद्वार में करीब 20, ऋषिकेश में 30, देहरादून और मसूरी में 20 से 25 और तपोवन में 10 फीसदी काम अभी बाकी है।
चाहे केंद्र की सरकार हो या राज्य की, गंगा की स्वच्छता के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। नमामि गंगे के तहत 875 करोड़ के बजट से काम शुरू करने की हम स्थिति में आ रहे हैं। जर्मनी के प्रयास से इस अभियान पर भी तेजी से काम होगा।
- प्रकाश पंत, पेयजल मंत्री, उत्तराखंड
गंगा और सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए हमारे आज तक के प्रयासों में जर्मनी का साथ जुड़ जाने से बेहद मदद मिलेगी। पांच शहरों में फिर सीवरेज सिस्टम डेवलपमेंट के लिए बजट की आवश्यकता नहीं पडे़गी।
- भजन सिंह, एमडी, पेयजल निगम