नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों का यदि सख्ती से पालन करवाया गया तो गंगा को निर्मल बनाने के लिए सरकार को अपने खजाने से धन खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सूत्रों के अनुसार एनजीटी होटलों के बाद सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों को भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दायरे में लाएगी। माना जा रहा है कि इससे प्रदेश में सालाना पांच से छह करोड़ रुपए का राजस्व एकत्र होगा। जबकि अकेले जिले के होटलों से ही एक करोड़ का राजस्व मिलेगा।
हर साल मिलने वाली इस भारी भरकम रकम से सरकार बिना बोझ के सीवर ट्रीटमेंट प्लांटों का विस्तार कर सकेगी। जो गंगा और सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने में मददगार होगी।
गौरतलब है कि एनजीटी ने जिला प्रशासन को सभी होटलों का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कराए जाने के आदेश दिए हैं। इस आदेश के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है और जिलाधिकारी ने तीन सप्ताह में बोर्ड से रजिस्ट्रेशन नहीं लेने वाले होटलों के लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी दी है।
एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रजिस्ट्रेशन लिए जाने का आदेश तयशुदा नीति के तहत लिया है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही एनजीटी नगर निगम, जल संस्थान, एचआरडीए, ऊर्जा निगम, परिवहन निगम, तहसील प्रशासन, विकास विभाग सहित सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों को भी इस आदेश के साथ जोड़ेगा। जानकारों की माने तो इससे प्रदेश को सालाना पांच से छह करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा।