उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में नौवीं के छात्र को अपना सही नाम लिखना नहीं आता। स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और गरीबों के बच्चे सरकारी स्कूलों में खिचड़ी खाने के लिए आ रहे हैं एवं ठगे जा रहे हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अफसर राजनीतिक दबाव में न आएं, वे वहीं करें जो सही हो। यह कहना है लोक सभा की याचिका समिति का। सोमवार को देहरादून में आयोजित लोकसभा की याचिका समिति की बैठक में विभिन्न राज्यों से दून पहुंचे सांसदों ने कहा कि छात्र हित के मामलों में अधिकारी राजनीतिक दबाव में न आएं।
कोई अधिकारी सही काम करता है तो एक न एक दिन मामला उसी के पक्ष में आएगा। सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान लागू होने से पहले और बाद की स्थिति को बताया जाए। प्राथमिक से लेकर महाविद्यालयों की स्थिति स्पष्ट की जाए।
न चलने वाले विद्यालयों की जानकारी मांगी
बैठक में मानक पूरे न करने की वजह से न चलने वाले विद्यालयों की स्थिति की भी जानकारी मांगी गई। बैठक में सांसद दिनेश द्विवेदी, छेदी प्रसाद, रामबहल चौधरी, अपर मुख्य सचिव एस राजू, शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा आरके कुंवर, निदेशक बेसिक शिक्षा सीमा जौनसारी मौजूद रहे।
इन स्कूलों की थपथपाई पीठ
लोकसभा की याचिका समिति की बैठक में सांसदों ने केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में शिक्षक पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं।
सरकारी के 51 हजार बच्चे पब्लिक स्कूलों में
बैठक में शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने कहा कि आरटीई के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों के 51 हजार बच्चे अब पब्लिक स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इन पर पिछले चार सालों में सौ करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वहीं, हमारे स्कूलों खाली होते जा रहे हैं।