उत्तराखंड सरकार ने भले ही सेवा का अधिकार कानून के तहत हर काम के लिए समयसीमा तय कर दी है, लेकिन तहसील के कर्मचारियों-अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं है।
‘कल आना’ कहकर टाल देते हैं काम
लोगों को अपने काम के लिए पहले की तरह ही धक्के खाने पड़ रहे हैं। संबंधित कर्मचारी तय दिन पर बुलाते हैं पर खुद गायब मिलते हैं या ‘कल आना’ कहकर टाल देते हैं।
सोमवार को तहसील में लोग परेशान रहे। ज्यादातर लोग आय प्रमाण पत्र और मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटकते रहे। अधिकतर लोगों ने एक महीना पहले आवेदन किए थे लेकिन अब तक प्रमाण पत्र नहीं मिले।
जबकि सेवा के अधिकार अधिनियम के तहत दस दिन में आय प्रमाण पत्र और मूल निवास प्रमाण पत्र बन जाना चाहिए।
लोगों की नाराजगी इस बात पर भी थी कि पटवारी तहसील में उन्हें बुलाते हैं लेकिन मिलते नहीं हैं या उनका घंटों इंतजार करना पड़ता है। अधिकारियों से कोई ठोस जवाब नहीं मिलता। आने जाने पर समय और धन बेकार होता है सो अलग।
17 दिन बाद भी प्रमाण पत्र नहीं मिला
मोथरावाला निवासी धर्मपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने दस जुलाई को आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन दिया था। 17 दिन बाद भी प्रमाण पत्र नहीं मिला।
पटवारी ने पिछले शुक्रवार को बुलाया था लेकिन खुद नहीं आया। सोमवार को आने के लिए कहा था लेकिन आज भी नहीं आया।
हाथीबडकला निवासी वैशाली बताती हैं कि मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए एक माह पहले आवेदन दिया था लेकिन आज तक नहीं मिला। तहसील में कई बार संबंधित अधिकारियों से पूछा पर कोई सही जवाब नहीं देता। सब इधर से उधर भेजते रहते हैं।
पटेल नगर की रहने वाली अनिता ने बताया कि आठ जुलाई को आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन दिया था।
संबंधित अधिकारी रोज ‘कल आना’ कहकर टरका देते हैं। कोई सही जवाब तक नहीं देता। इतनी दूर से किराया लगाकर आते हैं और बिना काम के लौटना पड़ता है।