सर्कुलर ट्रेडिंग करने वाली फर्में राज्य कर विभाग के रडार पर रहेंगी। खाद्य तेल, लोहा और स्टील की फर्मों के पंजीकरण आवेदनों की विभाग पूरी छानबीन करेगा। इसके बाद ही आवेदनों पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी। तीनों सेक्टर की अस्तित्व में मौजूद फर्मों की भी जांच की जा रही है।
कुमाऊं में 50 हजार से अधिक व्यापारी राज्य कर विभाग में जीएसटी के तहत पंजीकृत हैं। दिसंबर 2017 से अगस्त 2018 तक आयरन व स्टील से जुड़ी करीब आठ फर्मों ने कई राज्यों में करोड़ों का कारोबार किया और टैक्स कम जमा किया। जब विभाग ने इसकी जांच शुरू की तो देश के कई राज्यों में कारोबार का खुलासा हुआ था। इस पर राज्य कर विभाग ने इनका पंजीकरण रद्द कर दिया और दूसरे राज्यों को भी पत्र लिखकर फर्मों के कर चोरी के बारे में जानकारी दे दी। अब राज्य कर विभाग तीनों सेक्टरों से फर्म रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह से एहतियात बरत रहा है। लोहा, खाद्य तेल और स्टील के पंजीकरण आने पर पहले फर्म का पता, उसके मालिक, पैन नंबर आदि की जांच की जा रही है। इसके बाद ही पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
क्या है सर्कुलर ट्रेडिंग
सर्कुलर ट्रेडिंग करने वाली फर्म एक ही पैन पर कई रजिस्ट्रेशन करा लेती है। एक ही राज्य में या कई राज्यों में कारोबार दिखाती है। एक बैंक खाता भी होता है लेकिन उसमें अधिक ट्रांजेक्शन या लिक्विडिटी नहीं होती है। ऐसे कारोबारी आपस में ही सामान बिक्री दिखाते रहते हैं। इनकी बिक्री करोड़ों में होती है, लेकिन इसके मुकाबले टैक्स केवल हजारों में जमा करते हैं। यह गतिविधि वास्तविक खरीद-बिक्री पर नहीं होती है। केवल कागजों में दिखाया जाता है। ये आपस में ही क्रेडिट का ट्रांसफर करते हैं। सर्कुलर ट्रेडिंग वाले कम समय के लिए ही व्यापार करते हैं। इतने में ही करोड़ों का कर चोरी कर फरार हो जाते हैं।
पिछले साल कुछ फर्मों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया था। खाद्य तेल, आयरन स्टील और लोहा की फर्मों की स्थलीय जांच भी कराई जा रही है। जांच के बाद ही पंजीकरण किया जाएगा जिससे टैक्स चोरी रुक सके।
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बीएस नगन्याल, अपर आयुक्त, काशीपुर जोन