आठ जून को रामा से 17 किलोमीटर पैदल चलकर ज्योलीकांग में आदि कैलाश के दर्शन के बाद देर शाम तक वापस रामा आएगा। नौ जून को रामा, दांतु होते हुए वाहनों से वापस धारचूला लौटेगा। दिलिंग दारमा सेवा समिति के अध्यक्ष पूरन सेलाल ने कहा कि इस प्रकार की यात्रा से दारमा घाटी में पर्यटन बढ़ेगा और युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने आईटीबीपी के डीआईजी के इस प्रयास की सराहना करते हुए राज्य सरकार और केंद्र से छोटा कैलाश यात्रा को दारमा और व्यास दोनों घाटियों से संचालित करने की मांग की है।
व्यास घाटी की अपेक्षा दारमा घाटी सुगम और सरल यात्रा है। दारमा घाटी से यात्रा होने पर पर्यटकों को दोनों घाटी के दर्शनीय स्थलों को देखने का मौका मिलेगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। छोटा कैलाश यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को आईटीबीपी मेडिकल सुविधा या अन्य तरह की मदद उपलब्ध कराएगी। -एपीएस निंबाडिया डीआईजी, आईटीबीपी।
कुमांऊ मंडल विकास निगम छोटा कैलाश यात्रा 13 जून से शुरू करेगा। यात्रा व्यास घाटी के परंपरागत रूट से होकर संचालित होगी। यात्रियों की सुविधाओं के लिए सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं। - अशोक जोशी, जीएम केएमवीएन।