2017-18 में सरकार बदली तो योजनाओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और आधार से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस बीच छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के भी आदेश जारी हुए और शिकंजा कसना शुरू हुआ। छात्रों के खाते आधार से लिंक होते ही लाभार्थियों की संख्या में जबर्दस्त गिरावट दर्ज हुई।
जांच का शिकंजा
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद छात्रवृत्ति घोटाले की एसआईटी जांच के आदेश हुए। अब जाकर जांच में तेजी दिख रही है। लेकिन जांच को लेकर मचे हल्ले के बीच शासन स्तर पर छात्रवृत्ति योजना को राष्ट्रीय पोर्टल से जोड़ा गया। आधार की अनिवार्यता होने के बाद हजारों की संख्या आवेदन कम हो गए।
एससी दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना
वित्तीय वर्ष आवेदन लाभार्थी छात्र खर्च
2014-15 89, 476 81176 96 करोड़ 82 लाख 6 हजार
2018-19 51, 840 38,335 31 करोड़ 74 लाख 32 हजार
ओबीसी दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना
वित्तीय वर्ष आवेदन लाभार्थी छात्र खर्च
2014-15 41259 41259 33 करोड़ 79 लाख 40 हजार
2018-19 21559 12647 12 करोड़ 27 लाख 60 हजार
विभाग की सारी योजनाएं नेशनल पोर्टल से जुड़ेंगी
समाज कल्याण विभाग में केंद्र पोषित समस्त कल्याणकारी योजनाओं को नेशनल पोर्टल से जोड़ा जाएगा। अपर सचिव समाज कल्याण रामविलास यादव का कहना है कि पिछले एक साल के दौरान छात्रवृत्ति योजना को नेशनल पोर्टल से जोड़ा गया। अब सभी छात्रवृत्ति, पेंशन व अन्य कल्याणकारी योजनाओं को पोर्टल से जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार के स्तर की योजनाओं को राज्य स्तरीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा।