चोराबड़ी ग्लेशियर के आटोमेटिक वेदर स्टेशन (एडब्लूएस) की परख अब आने वाले मई-जून माह में होगी। केदारनाथ गई वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान की टीम लौट आई है।
अभी टावर स्थापित करने के लिए चोराबाड़ी ग्लेशियर के आस-पास परिस्थितियां अनुकूल नहीं। टीम मई-जून में एक बार फिर वहां का दौरा कर परिस्थितियों का जायजा लेगी।
संस्थान के ग्लेशियर विशेषज्ञ डा. डीपी डोभाल के अनुसार मार्ग की स्थिति ठीक है, लेकिन ग्लेशियर के आस-पास उपकरण स्थापित करने के लिए अभी स्थिति माकूल नहीं। मई-जून में जब बर्फ पिघलना शुरू होगी तब एक बार फिर वहां जाकर देखा जाएगा। बता दें, उत्तराखंड में कुल 948 ग्लेशियर हैं।
इनमें से कई ऐसे हैं, जो बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धामों के इर्द-गिर्द स्थित हैं। इनमें बदरीनाथ में सतोपंथ, हरवा, केदारनाथ में चोरबाड़ी, गंगोत्री में गंगोत्री, जबकि यमुनोत्री में खतलिंग, बूढ़ा केदार जैसे बड़े ग्लेशियरों के नाम लिए जा सकते हैं।
ग्लेशियर इनवेंटरी तो बनाई गई है, लेकिन इनसे बनने वाली झीलों का आंकड़ा मौजूद नहीं, लिहाजा इनकी निगाहबानी बेहद मुश्किल है।