भारत के साथ चीन पहले भी ऐसा कर चुका है।
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भारत के साथ बड़ी अंतराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाला चीन कभी भी भारत में जल प्रलय ला सकता है। हिमालय क्षेत्र में मौजूद अपनी झीलों के जलस्तर के बारे में भारत से जानकारी साझा करने में चीन समझौते का उल्लंघन कर रहा है। इन झीलों का पानी भारत के निचले सरहदी क्षेत्र वाले इलाकों में तबाही ला सकता है।
इस स्थिति से आशंकित वैज्ञानिकों ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि चीन से लगी सीमा पर नदीय वेधशालाएं स्थापित की जाएं ताकि झीलों के जलस्तर के संबंध में जानकारी मिलती रहे। वैज्ञानिकों को आशंका है कि चीन हिमालय क्षेत्र में अपनी नदीय झीलों का भारत के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।
चीन-भारत सीमा की स्थिति के बारे में वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की यह आशंका सिर्फ कल्पना पर आधारित नहीं है।
पहले भी चीन कर चुका है ऐसी हरकत
चीन झीलों के बारे में जानकारी नहीं देता है।
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चीन ऐसी हरकत पहले कर चुका है, जिसका खामियाजा ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे पर आबाद सैकड़ों लोगों को भुगतना पड़ा था। वर्ष 2000 में ब्रह्मपुत्र में तबाही लाने वाली बाढ़ आई थी। नदी के दोनों किनारों पर बसी आबादी बर्बाद हो गई थी।
अचानक आई इस बाढ़ की देश के लोगों को भनक तक नहीं लगी थी। उस वक्त चीन ने इससे अनभिज्ञता जाहिर की थी। इसके बाद वैज्ञानिकों ने यहां अध्ययन कार्य शुरू किया। यहां स्थित एक वेधशाला में रखे पानी के नमूनों की जांच की गई।
पानी में पाए गए तत्वों पर किए गए अध्ययन से खुलासा कि यह पानी चीन की यंग बो नदीय झील का था। यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित भी हुआ था। चीन ने इस झील के संबंध में भारत को कोई जानकारी नहीं दी थी।
चीन ऐसे बना सकता है कृत्रिम झील
चीन
अब चीन में नदीय झीलों से ऐसी स्थिति फिर बन रही है। वास्तव में सभी नदियां चीन से होकर भारत में आती हैं। ऊपरी हिस्से में पानी रोक कर कृत्रिम नदीय झीलें बनाई जा सकती हैं।
ऊंचाई पर स्थित इन झीलों का पानी यदि अचानक फूट पड़े तो पानी की तेज धारा भारत के निचले सरहदी क्षेत्र वाले इलाकों में तबाही ला सकती है।
इस आशंका के मद्देनजर वैज्ञानिकों ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि सुरक्षा के लिहाज से सरहदी क्षेत्र में वेधशालाएं खोली जाएं, साथ ही सेटेलाइट से चीन की नदीय झीलों की निगरानी भी की जाए। इससे सरहदी क्षेत्र वाले निचले भारतीय इलाके सुरक्षित रहेंगे।
इनका है कहना
‘चीन ट्रांसबाउंड्री कंट्रीज निगरानी पॉलिसी का उल्लंघन कर चुका है। बहुत सी नदियों के जलस्रोत चीन के क्षेत्र में आते हैं। वह उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित है इसलिए वह दादागीरी कर सकता है। इस खतरे पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। केंद्र सरकार को वहां वेधशालाओं की व्यवस्था करनी चाहिए।’
- डॉ. संतोष राय (वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाडिया भू-विज्ञान संस्थान)