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Dehradun News: आरटीई के लिए बच्चों के ऑफलाइन होंगे आवेदन, दिव्यांगों को मिलेगी प्राथमिकता

Sun, 09 Apr 2023 06:16 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून

सार

राइट टू एजुकेशन के तहत नर्सरी में दाखिला तीन वर्ष से अधिक उम्र में और कक्षा एक में दाखिला पांच वर्ष से अधिक की उम्र में होता है।
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शिक्षा का अधिकार - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने के लिए गरीब परिवारों के बच्चों को अब ऑफलाइन आवेदन करने होंगे। ऐसे में बच्चे की स्थिति के मुताबिक दाखिला दिया जाएगा। इससे बच्चों को लॉटरी का इंतजार नहीं करना होगा। इसके अलावा पार्षद से लिखवाकर वार्ड नंबर लाना भी अनिवार्य किया गया है। हालांकि, अब तक शासन की ओर से आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।

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उप खंड शिक्षा अधिकारी विनोद रावत ने बताया कि आवेदन कब से शुरू होंगे इस बारे में अभी निर्देश नहीं आए हैं। आवेदन में बच्चों की उम्र बढ़ाने की बात भी चल रही है। उनहोंने बताया कि अब बच्चे की स्थिति के मुताबिक स्कूल का आवंटन होगा। कौन सा स्कूल बच्चे के नजदीक है और किस बच्चे को आरटीई की सख्त जरूरत है, उसका भी ध्यान रखा जाएगा।
आरटीई के आवेदन का काम देखने वालीं प्रिया ने बताया कि पिछले तीन साल से आरटीई के आवेदन ऑनलाइन हो रहे थे। इससे तमाम जरूरतमंद, दिव्यांग बच्चे छूट जाते थे।
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यह है राइट टू एजुकेशन एक्ट
प्रिया ने बताया कि राइट टू एजुकेशन के तहत नर्सरी में दाखिला तीन वर्ष से अधिक उम्र में और कक्षा एक में दाखिला पांच वर्ष से अधिक की उम्र में होता है। इसमें नर्सरी और कक्षा एक के अलावा अन्य कक्षाओं में दाखिला नहीं होता है। बच्चा आठवीं कक्षा तक राइट टू एजुकेशन के तहत शिक्षा प्राप्त करता है।

इसीलिए पिछड़ जाते हैं बच्चे
प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष प्रेम कश्यप का कहना है कि गरीब परिवारों के बच्चे होशियार होते हैं। अगर सही शिक्षा मिले तो आगे निकल जाते हैं। सही शिक्षा मिलने पर देरी होने पर वह पिछड़ जाते हैं। अब तक आरटीई के आवेदन का इंतजार हो रहा है।

केस-1
बंजारावाला निवासी छह वर्षीय मोनू के माता-पिता गरीब परिवार से आते हैं। मोनू पढ़ने में बहुत अच्छा है, इसलिए वह चाहते हैं कि मोनू का किसी अच्छे स्कूल में दाखिला दिलवाएं। आरटीई के तहत दाखिला करवाने का इंतजार कर रहे हैं।

केस 2
पटेलनगर निवासी सात वर्षीय गौरी की मां ने बताया कि गौरी पढ़ने में होशियार है, लेकिन हम आर्थिक रूप से कमजोर हैं। हम चाहते हैं कि बेटी का दाखिला आरटीई के तहत हो जाए। ताकि, उसे अच्छी शिक्षा मिल सके।

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