children who orphaned by the disaster left village
- फोटो : amar ujala
पिथौरागढ़ में आपदा प्रभावित गांव कुमालगौन का दर्द 40 दिन बाद एक बार फिर उस वक्त छलक पड़ा जब यहां के तीन बच्चे बेहतर भविष्य की आस में अपनी जड़ों से दूर हो गए।
आपदा में परिवार का बिखरना और अनाथ बच्चों का अपने गांव और गलियों से दूर का दर्द कोई कुमालगौन के लोगों से पूछे। प्रकृति के कहर में माता-पिता और भाई को गंवाने के बाद अनाथ बच्चे जब बृहस्पतिवार सुबह 8.30 बजे टिहरी के लिए विदा हुए तो माहौल काफी गमगीन हो गया।
बच्चों के संगी-साथी, नाते-रिश्तेदार और गांववासियों, हर किसी की आंखें छलक पड़ीं। कई साथी तो फूट-फूट कर रोने लगे। तीन बच्चों को पंतजलि योगपीठ के टिहरी स्थित आवासीय विद्यालय भेजा गया है।
कुमालगौन में 30 जून की रात बादल फटने के बाद मकान जमींदोज होने से बचीराम, उनकी पत्नी पार्वती देवी और बड़े बेटे मनोज की मौत हो गई थी जबकि उनके तीन बच्चे 16 वर्षीय कमलेश, 14 वर्षीय ललित और 12 वर्षीय निर्मला बच गए थे। अब तक यह तीनों बच्चे अपने ताऊ बहादुर राम के संरक्षण में नाचनी स्थित राहत कैंप में रह रहे थे।