बरसात में जल जनित बीमारियों के अलावा बच्चे दिमागी बुखार (मेनिनजाइटिस) से भी पीड़ित हो रहे हैं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दिमागी बुखार से पीड़ित तीन बच्चे भर्ती हैं।
कोरोना की तीसरी संभावित लहर में बच्चों के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में परिजन बुखार से पीड़ित बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की सलाह पर ऐसे बच्चों की कोरोना की आरटीपीसीआर के साथ-साथ दिमागी बुखार और अन्य विभिन्न जांच की जा रही हैं। जिसमें कुछ बच्चों में दिमागी बुखार (जापानी दिमागी बुखार नहीं) की भी पुष्टि हुई है। इनमें से दो बच्चों को बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस (बैक्टीरिया वाला दिमागी बुखार) और एक बच्चे को ट्यूबरकुलर मेनिनजाइटिस (टीबी वाला दिमागी बुखार) है। गंभीर होने के चलते तीनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इन्हें 24 घंटे के ऑब्जरवेशन के लिए पीआईसीयू (बच्चों के आईसीयू) में भी भर्ती करना पड़ा। अब यह तीनों बच्चे सामान्य वार्ड में शिफ्ट किए जा चुके हैं। बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विशाल कुमार समेत अन्य विशेषज्ञों की देखरेख में इन बच्चों का उपचार चल रहा है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक ने बताया कि तीनों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है। उन्हें कम से कम 10 दिन तक एंटीबायोटिक इंजेक्शन और अन्य जरूरी दवाएं अस्पताल में ही दी जाएंगी।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
-अगर बच्चों को तेज बुखार के साथ दौरे पड़ रहे होें। यह वायरल, बैक्टीरियल या ट्यूबरकुलर मेनिनजाइटिस हो सकता है।
-वायरल संक्रमण और जल जनित रोग भी बढ़ रहे
डॉ. अशोक के मुताबिक आजकल बरसात के चलते वायरल संक्रमण और डायरिया, उल्टी-दस्त, पेचिश, पेट के संक्रमण जैसे जलजनित रोगों से संबंधित पीड़ित बच्चे भी परिजनों द्वारा अस्पताल लाए जा रहे हैं। ओपीडी में भी इस तरह के बच्चों की संख्या बढ़ने से गंभीर हालत वाले बच्चों को भर्ती भी करना पड़ रहा है।
विषाक्त का सेवन भी कर रहे बच्चे
दून अस्पताल के बच्चा वार्ड में ऐसे भी मरीज भर्ती हो रहे हैं जो विशाक्त का सेवन कर दे रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक लॉकडाउन खुलने के बाद बच्चों के बाहर निकलने के चलते अभिभावकों का ध्यान संभवत कम होने के कारण बच्चे गलती से या गलत संगत के चलते अल्कोहल आदि का सेवन कर रहे हैं। दो बच्चे ऐसे भी पहुंचे जिन्होंने कोई कीटनाशक खा लिया था। हालांकि बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र के इन सभी मरीजों की हालत अब सामान्य है।
इन बातों का रखें ख्याल
-बच्चों को साफ और उबला हुआ पानी दें।
-बच्चों के खानपान में तरल और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अधिक से अधिक शामिल करें।
-ताजे व रेशेदार फल-सब्जियों को नियमित तौर पर दें।
-छोटे बच्चों को बोतल या रबड़ के निप्पल से दूध पिलाने के बजाय मां का दूध पिलाएं।
-अगर मां का दूध पर्याप्त न हो रहा हो तो बाहर का दूध चम्मच या अगर बच्चा बड़ा है तो गिलास से दें।
-साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और किसी तरह की दिक्कत होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं।
-लंबे समय तक कोरोना काल में घरों में रहने के चलते बच्चों में कुछ मानसिक बदलाव भी देखे जा रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों से घुलमिल कर रहे और उनकी गतिविधियों पर ध्यान दें। अगर किसी तरह की दिक्कत हो रही हो तो बच्चों या मनोरोग के डॉक्टर से परामर्श लें।