अमर उजाला फाउंडेशन के सदाबहानी गगास अभियान पदयात्रा के अंतिम दिन पदयात्रियों ने बृहस्पतिवार को बोरखोला, खखोली, उलैड़ा, हाथीखुर आदि गांवों में जन संपर्क किया। बोरखोला में स्कूली बच्चों ने अपने यहां के नौलों, धारों, गाड़, गधेरों, जंगल, गगास के बारे में अधिक से अधिक जानकारी जुटाने के लिए अपने अभिभावकों व शिक्षकों से निरंतर बात करने का संकल्प लिया।
शिक्षकों ने भी कहा कि वे शिक्षा को अधिक अर्थपूर्ण बनाने के लिए पाठ्यक्रम में पर्यावरण की स्थानीय जरूरतों और समस्याओं के समाधान के विषय का समावेश करेंगे।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शिक्षकों से स्थानीय लोगों के सहयोग से जंगल और पानी के रिश्तों को समझने और जरूरत के हिसाब से काम की शुरुआत करने का संकल्प लेने की अपील की गई। बोरखोला में महिला मंगल दल ने गांव के नौले के सुधार के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया।
सदाबहानी गगास अभियान के तहत बृहस्पतिवार को पदयात्रा नौलों, धारों के गांव बोरखोला में पहुंची। यहां पर स्थित राजकीय जूनियर हाइस्कूल के बच्चे पदयात्रा में शामिल हुए। बच्चों ने बताया कि उनके गांव में एक घराट है जो अभी भी चल रहा है। गांव में दो धारे हैं और एक नौला है जिनमें पानी कम हो रहा है। बच्चों ने कहा कि पानी को बढ़ाने के लिए जंगल को आग से बचाया जाना जरूरी है। जंगल में बांज और उतीस जैसे पेड़ लगाए जाने चाहिए। बच्चों ने इस बात का संकल्प भी लिया कि वे घराट, नौलों और धारों से संबंधित जानकारी बढ़ाने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों से भी बात करेंगे।
राजकीय जूनियर हाइस्कूल के प्रधानाचार्य विनोद थापा ने कहा कि बच्चों को आसपास के जंगल, नौलों, धारों के महत्व की जानकारी भी दी जाएगी। प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक भुवन चंद्र लोहनी ने कहा कि बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए पाठ्यक्रम में स्थानीय पर्यावरण संबंधित विषयों को जोड़ा जाएगा। बोरखोला के बगल से ही नौलाधार गधेरा आता है जो आगे जाकर गगास में मिलता है।
इसी गधेरे के किनारे गांव में दो धारे भी हैं। गर्मियों में इन धारों में पानी अब कम होता जा रहा है। स्कूल में हुई बैठक के बाद छात्र रैली की शक्ल में पदयात्रा में शामिल हुए। गगास बचाओ के नारे लगाते हुए ये बच्चे बोरखोला तोक तक पहुंचे।
बोरखोला तोक में महिला मंगल दल की अध्यक्ष तारा जोशी ने कहा कि महिला मंगल दल जल्द ही गांव के नौलों की सफाई करेगा। गगास को बचाने के अभियान में गगास की विभिन्न धाराओं को पुनर्जीवित किया जाना भी जरूरी है। तारा जोशी के मुताबिक महिला मंगल दल पहले ही किल्मोड़ा, हिसालू, घिंघारू आदि की झाड़ियों को ना काटने का संकल्प ले चुका है।
गांव के ठीक ऊपर बरसों पहले बनाया गया एक खाव है। इस खाव का अब कोई उपयोग नहीं होता। उस खाव में मिट्टी भर चुकी है। गांव में एक अति प्राचीन नौला भी है। नौले में पानी है, गर्मियों में भी पानी बहता है लेकिन इसका रखरखाव नहीं हो पा रहा है। महिला मंगल दल जल्द ही इस नौले की सफाई करेगा और नौले के जल संग्रहण क्षेत्र को भी संवारेगा।
तारा जोशी ने कहा कि खाव की ओर अभी तक महिला मंगल दल का ध्यान नहीं गया था। अब इसके बारे में भी सोचा जाएगा। गगास के किनारे के खखोली, हाथीखुर, उलैड़ा आदि गांव भी हैं। उलैड़ा की दीपा जोशी ने कहा कि गधेरे में पानी को बढ़ाने के लिए गांव की महिलाओं ने कुछ समय पूर्व वन पंचायत क्षेत्र में गड्ढे भी बनाए थे