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10 सालों के अंदर उत्तराखंड में घटी शिशु-मृत्यु दर, औसत राष्ट्रीय औसत दर से नीचे आया आंकड़ा

Sat, 01 Jun 2019 10:17 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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उत्तराखंड में शिशु मृत्यु दर का औसत घटा है। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 10 सालों के भीतर प्रदेश में शिशु मृत्यु का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत दर से भी नीचे आया है। केंद्र सरकार के सैंपल रिसर्च सिस्टम (एसआरएस) की सर्वे रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

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केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 से 2017 तक देश के सभी राज्यों में शिशु मृत्यु दर का सर्वे किया। एसआरएस की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। 2008 में प्रदेश में प्रति एक हजार शिशुओं में 38 की मृत्यु हो रही थी।

प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराने के लिए चलाए गए जागरूकता अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के चलते शिशु मृत्यु दर के नतीजे भी सकारात्मक आए हैं। शिशु मृत्यु दर पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में प्रति एक हजार शिशु मृत्यु दर का औसत 32 है।

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जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 33 और शहरी क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर का औसत 30 है। पूरे प्रदेश का औसत मृत्यु दर राष्ट्रीय औसतन दर से कम है। वर्तमान में शिशु मृत्यु दर का राष्ट्रीय औसतन 33 है।

हालांकि शिशु मृत्यु दर को कम करने में केरल देश का सबसे अग्रणी राज्य है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रविंद्र थपलियाल का कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है, जिसकी वजह से शिशु मृत्यु दर के परिणाम अच्छे आए हैं। सरकार की ओर से संस्थागत प्रसव कराने के लिए गर्भवती महिलाओं को कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। इस वजह से संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी हुई है। 

शिशु मृत्यु दर कम होना उत्तराखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। सरकार की ओर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विभाग के सभी चिकित्सकों, कर्मचारियों को भी इस उपलब्धि का श्रेय जाता है। शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
-नितेश कुमार झा, सचिव, स्वास्थ्य विभाग
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