चार महीनों से योजना आयोग के अस्तित्व को लेकर मचे घमासान और राजनीति का पटाक्षेप रविवार को दिल्ली में होने वाली मुख्यमंत्रियों की बैठक में हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना आयोग के स्वरूप, कार्यप्रणाली आदि को लेकर देश भर के मुख्यमंत्रियों को बुलाया है। जिसमें सभी राज्य इस मुद्दे पर अपने विचार रखेंगे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे। सूत्रों की मानें तो सीएम के भाषण का फोकस इस बात पर होगा कि आयोग का नाम भले ही बदल दिया जाए, लेकिन काम न बदलें।
सीएम हरीश रावत शुरू से ही कहते आए हैं कि राज्यों को अपनी योजनाओं और मांगों के लिए सालों से केंद्र सरकार से दो प्लेटफार्म योजना आयोग और नेशनल डेवलेपमेंट काउंसिल मिले हुए हैं। योजना आयोग समाप्त होने के बाद राज्यों के सामने भ्रम की स्थिति हो गई है।
केंद्र सरकार इन दोनों संगठनों को अधिक मजबूत बनाए ताकि राज्यों के अधिकार और विकास में बाधा न आए। सीएम इस बात पर भी अडिग नहीं हैं कि योजना आयोग नाम की ही संस्था काम करे। उनका मानना रहा है कि संस्था का नाम भले ही बदल जाए, लेकिन राज्यों की सुनवाई का एक मजबूत मंच जरूरी है।
वहीं, सम्मेलन में सीएम पहाड़ी राज्यों को ग्रीन बोनस, आपदा प्रभावित राज्य के लिए अतिरिक्त ढांचागत सुविधाएं व आर्थिक मदद का मामला भी उठा सकते हैं।
जल्द ही उत्तराखंड में मिलेगा फ्री इलाज
लंबे समय से टल रही मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का खाका आखिर स्वास्थ्य विभाग ने तैयार कर ही लिया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की तर्ज पर स्वास्थ्य विभाग ने योजना तैयार की है, जिसमें एपीएल परिवारों को 1.70 लाख रुपए की कैश लैस सुविधा मिलेगी। इस योजना से प्रदेश के 85 लाख लोगों को फायदा मिलेगा। योजना के तहत फ्री इलाज के लिए 600 बीमारियां चिन्हित की गई हैं।
उत्तराखंड के सभी नागरिकों को स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा के तहत लाने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीती 15 अगस्त से योजना को लांच करने की घोषणा की थी, लेकिन योजना में कई तकनीकी दिक्कतों के कारण दो बार लांचिंग टाल दी गई।
योजना के तहत दिया जाएगा स्वास्थ्य कार्ड
अब सीएम आने वाली 26 जनवरी को यह योजना लांच करेंगे। कैश लैस इलाज की सुविधा वाली इस योजना में सरकारी कर्मचारी शामिल नहीं हैं। योजना के तहत एक स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया जाएगा।
कार्ड दिखाकर बीमार व्यक्ति प्रदेश के राजकीय चिकित्सालयों व कुछ चुनिंदा अस्पतालों के साथ ही प्रदेश के बाहर के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में बिना फीस दिए इलाज करवा सकते हैं। योजना के तहत प्रदेश के बाहर इलाज कराने वालों को आने-जाने के लिए नियमानुसार किराया देने की भी व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस योजना में गैर सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया गया है। 600 बीमारियां चिन्हित हैं, जिसके लिए अस्पतालों का प्रदेश और प्रदेश के बाहर भी चिन्हीकरण किया गया है। पीजीआई चंडीगढ़ जैसे बड़े अस्पालों में भी मरीज निशुल्क इलाज करवा सकेंगे।
- ओम प्रकाश, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य