युवती ने डॉक्टर पर दुष्कर्म करने और पत्नी पर मामले को छिपाए रखने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। यह भी आरोप है कि यह सिलसिला वर्ष 2014 तक चलता रहा। ज्यादा तबीयत खराब होने पर उसे घर भेज दिया गया। उसे किसी को भी इस बारे में जानकारी देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी। दिल्ली पुलिस ने पीड़िता की एफआईआर को शून्य में दर्ज कर उसे उत्तराखंड भेज दिया है।
प्रक्रिया के अनुसार एफआईआर पहले रेंज के आईजी कार्यालय पहुंचेगी, जहां से एसएसपी कार्यालय होते हुए कोतवाली में पहुंचेगी, फिर उसे हरिद्वार कोतवाली में क्राइम नंबर मिलेगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस ने बताया कि एफआईआर जब यहां पहुंचेगी, तब ही जांच शुरू की जा सकेगी।
शांतिकुंज के प्रचार विभाग की ओर से की जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में पूरे घटनाक्रम को गहरी साजिश बताया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जो मुकदमा दर्ज कराया गया है उसमें सारे आरोप निराधार और तथ्यहीन हैं।
एक दशक पहले घटना होनी बताकर अब मुकदमा दर्ज कराना खुद ही इस बात को साबित करता है कि पूरा प्रकरण द्वेष भावना से प्रेरित होकर किया गया है। यह संस्था की ख्याति को नुकसान पहुंचाने की साजिश के साथ ही संस्था से जुड़े 16 करोड़ साधकों के लिए भी बेहद द़ुखद और हृदय विदारक है। यह भी कहा गया है कि संस्था हर तरह की जांच में सहयोग के लिए तैयार है।