केंद्र सरकार की ओर से शुरू की जा रही दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री की कवायद और दवाओं की बिक्री के नियंत्रण के लिए प्रस्तावित ई-पोर्टल का विरोध करते हुए उत्तराखंड औषधि व्यवसायी महासंघ ने मंगलवार को केमिस्ट की दुकानें बंद कर विरोध जताया।
कोटद्वार केमिस्ट्स एसोसिएशन ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को ज्ञापन भेजा। संगठन ने कहा कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री से जहां एक ओर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा, वहीं दवा की गुणवत्ता भी प्रभावित होने की आशंका है।
उत्तरांचल औषधि महासंघ के बैनर तले मंगलवार को कोटद्वार केमिस्ट्स एसोसिएशन ने सभी दवाइयों की दुकानें बंद रखीं। दवाई विक्रेताओं ने तहसील परिसर में एकत्र होकर उपजिलाधिकारी के माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को ज्ञापन भेजा।
इस मौके पर प्रदर्शन कर एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि ई-फार्मेसी का फैसला लेकर केंद्र सरकार छोटे-छोटे दुकानदारों को खत्म करके मल्टीनेशनल कंपनियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। यदि सरकार गरीबों को सस्ती दवाइयां मुहैया करवाना चाहती है तो उसे टैक्स में छूट देनी चाहिए।
इससे अपने आप मरीजों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध हो जाएंगी। जिस तरह से सरकार दवाओं को ऑनलाइन कर रही है, इससे युवाओं में ड्रग एडिक्शन होने का खतरा बढ़ेगा। ऑनलाइन दवाई की खरीद से पहले ही मंदी का शिकार केमिस्टों को और नुकसान उठाना पड़ेगा।
इससे करीब आठ लाख 50 हजार कर्मचारियों के परिवारों की रोजी-रोटी भी बंद हो जाएगी, इसलिए सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए। इस मौके पर महासंघ के अध्यक्ष टीआर पांथरी, महामंत्री अमित गर्ग, विवेक अग्रवाल, दीपक बिष्ट, जेएस शिंदे, सुरेश गुप्ता, गोपाल कुकरेती, हिमांशु पंत, अनिल डबराल, विजय महेश्वरी व सुमित अग्रवाल आदि मौजूद थे।