उत्तराखंड सरकार ने अपनी आबकारी नीति को और लचीला और कंज्यूमर फ्रेंडली बनाया है। अब प्रदेश में पड़ोसी राज्यों की तरह ही कम वॉल्यूम की सस्ती देसी शराब मिलेगी।
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वहीं, विदेशी शराब पर ली जाने वाली एमजीडी (मिनिमम गारंटी ड्यूटी) में 15 फीसदी कमी की गई है। अब देसी शराब की दुकानों पर भी बीयर मिल सकेगी।
ग्राहक को बिल भी देना होगा
सरकार ने एमआरपी से अधिक रकम वसूलने वाले दुकानदारों को ब्लैकलिस्ट करने तक का प्रावधान रखा है। ये भी तय किया गया है कि शराब विक्रेता को ग्राहक को बिल भी देना होगा।
अपर सचिव आबकारी विनय शंकर पांडेय ने बताया अब देसी शराब की दुकानों में भी बीयर मिल सकेगी। ऐसा घाटा उठाने वाले देसी ठेकों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है। बताया कि अब तक प्रदेश में 36 वॉल्यूम की देसी शराब 43 रुपए की मिलती थी।
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पहली बार 28 वॉल्यूम की सस्ती शराब 30 रुपए में उपलब्ध होगी। ऐसा पड़ोसी राज्यों की कम तीव्रता और सस्ती शराब को देखते हुए किया गया है। इस प्रकार विदेशी शराब के दामों में कमी लाने के लिए एमजीडी में 15 प्रतिशत की कमी की गई है।
इससे पड़ोसी राज्यों से आने वाली विदेशी शराब की तस्करी रुकेगी। अब विदेशी शराब पर उत्पाद शुल्क 110 से लेकर 350 रुपए प्रति बोतल तक लिया जाएगा। माइल्ड बीयर पर 17 रुपए, स्ट्रांग वाइन पर 33 रुपए प्रति बोतल उत्पाद शुल्क देना होगा।
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अपर सचिव ने बताया कि तय कीमत से अधिक में मूल्य में शराब की बिक्री करने वाले दुकानदार को पहली बार एक दिन की बंदी, दूसरी बार पकड़े जाने पर तीन दिन की तालाबंदी और तीसरी बार ऐसा करते पकड़े जाने पर जुर्माने के साथ ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।
पुरानी नीति के मुताबिक ही शराब की दुकानें सुबह 10 से रात 10 तक खुलेंगी। पड़ोसी राज्यों से सटे जिलों में उन प्रदेशों के समय के मुताबिक दुकानें खुलेंगी व बंद होंगी।
बीयर प्लांट लगाने पर हर जिले में एक आउटलेट की छूट
प्रदेश में बीयर प्लांट लगाने वाले को प्रत्येक जिले में एक आउटलेट खोलने की छूट होगी। बताया गया कि राज्य के एग्रीकल्चर एवं हार्टीकल्चर पर आधारित एल्कोहलिक उत्पादों के लिए 10 प्रतिशत की बिक्री का आरक्षण किया गया है।
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शराब दुकानों के लिए लाटरी पद्धति में कुछ नई चीजें जोड़ी गई हैं। आवेदन के लिए अब प्रोसेस फीस 16 हजार की जगह 18 हजार की गई है। अब आवेदन के साथ जरूरी कागजात नहीं जमा कराने होंगे। जिसकी लाटरी निकलेगी उसे 20 दिन में संबंधित प्रमाणपत्र देने होंगे।
नहीं दिखा आपदा का असर
बीता साल आपदा के नाम रहा है और पर्यटकों की संख्या भी घटी है। बावजूद उत्तराखंड आबकारी विभाग के राजस्व पर कोई असर नहीं दिखा। बल्कि लक्ष्य 1150 करोड़ को लांघते हुए विभाग ने 120 करोड़ अधिक की कमाई की है।
मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने बताया कि जनवरी-फरवरी तक ही राजस्व 1270 करोड़ रुपए पहुंच गया है। उनका कहना है कि ऐसा वैट में कमी के कारण हुआ है।
सरकार ने वैट में पांच फीसदी की कटौती की थी जिससे शराब की बिक्री में बढ़ोत्तरी हुई। इसी का लाभ राजस्व में मिला है।