नहाय-खाय के साथ आज (रविवार) से छठ पूजा की विधिवत शुरूआत होने जा रही है। इसे लेकर शहर में कई जगह तैयारियां की जा रही है। टपकेश्वर मंदिर में श्रद्धालु नदी तट की सफाई कर अभियान की शुरूआत करेंगे।
रविवार सुबह श्रद्धालु टपकेश्वर मंदिर में छठ पूजा के लिए नदी तट की सफाई करेंगे। साथ ही भगवान सूर्य को अर्घ्य देने और पूजा के लिए जगह बनाई जाएगी। बिहारी महासभा के अध्यक्ष सतेंद्र सिंह ने बताया टपकेश्वर, प्रेमनगर, चंद्रबनी समेत तमाम स्थानों पर छठ पूजा के लिए व्यवस्था कराई जा रही है।
ब्रह्मपुरी में पार्षद सतीश कश्यप के नेतृत्व में लोगों ने छठ पूजा के लिए नहर बनाई। उन्होंने बताया कि अगले तीन दिन नहर में पानी की सप्लाई की जाएगी, ताकि लोग घर के नजदीक पूजा-अर्चना कर सकें। इसके अलावा रिस्पना नदी पर राजीव नगर वाले पुल समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी पूजा को लेकर तैयारियां की गई।
सतेंद्र सिंह ने बताया कि पहले दिन सुबह सभी लोग नहा-धोकर छठ की तैयारी करते हैं। लौकी और चना के साथ पीतल के बर्तन में मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी पर भात (चावल) पकाया जाता है। अगले दिन सोमवार को खरना मनाया जाएगा।
इसके बाद महिलाओं का व्रत शुरू हो जाएगा। महिलाएं रात और दिन व्रत लेती हैं। शाम को गुड और दूध डालकर चावल को पकाया जाता है। महिलाएं शाम को डूबते सूर्य अर्घ्य देती हैं। रात भर भजन-कीर्तन और गीत-संगीत किया जाता है।
अगले दिन तड़के चार बजे से महिलाएं पानी में खड़ी हो जाती हैं। इसके बाद उगते हुए सूर्य को गाय के दूध से अर्घ्य देने के साथ महिलाएं व्रत का परायण करती हैं।