भाई-दूज का त्योहार पूरे उत्साह से मनाया गया। बहनों ने भाईयों का तिलक किया और उनकी लंबी उम्र की कामना की। भाईयों ने भी बहनों को आकर्षक उपहार दिए।
पांच पर्वों का त्योहार मंगलवार को भाई-दूज के साथ संपन्न हो गया। मंगलवार को शहरभर में अधिकतर लोगों ने शुभ मुहूर्त में ही भाई-दूज का त्योहार मनाया। ज्योतिषियों के अनुसार द्वितीया तिथि में ही यह पर्व मनाना शुभ था। यह मुहूर्त मध्याह्न एक बजकर 16 मिनट तक था।
तिलक लगाया मिठाई खिलाई
इस शुभ समय में ही बहनों ने भाईयों का तिलक किया, उन्हें गोला देकर मिठाई खिलाई और आरती उतारी। भाईयों ने भी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए उन्हें आकर्षक उपहार दिए। हिमांशु ने अपनी बहनों को आर्टिफिशियल ज्वेलरी का सेट दिया। वहीं, वासु भले ही अपनी दोनों बहनों से छोटा है पर उसने अपनी पॉकेट मनी बचाकर बहनों के लिए आर्टिफिशियल अंगूठी खरीदी।
रूद्राक्ष ने अपनी नन्हीं बहन को बेबी किट और ड्रेस दी। उधर, गोर्खाली समुदाय के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक यह त्योहार मनाया। बहनों ने भाईयों को गेंदे के फूल की माला पहनाई और पूजा की।
यमी ने मांगा था वरदान
भाई-दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन यमराज की बहन यमी ने उसे भोजन के लिए घर बुलाया था। भोजन के पश्चात यमी ने भाई का टीका किया। यम ने बहन को वर मांगने को कहा तो यमी ने कहा कि इस दिन जो बहन अपने भाई का तिलक करे, उसे भोज कराए, उस भाई को यमलोक का भय नहीं होना चाहिए। यमराज ने वर दे दिया। तभी से भाई-दूज का त्योहार मनाया जाने लगा।