घोड़ा-खच्चर संचालकों का भी बढ़ेगा कारोबार
यात्रियों के भारी उत्साह को देखते हुए इस बार घोड़ा-खच्चर संचालकों का कारोबार भी बढ़ने की उम्मीद है। वर्ष 2023 में 205 दिन तक चली केदारनाथ यात्रा में घोड़ा-खच्चर संचालकों ने 125 करोड़ रुपये का व्यवसाय किया था। इससे जिला पंचायत को भी तीन करोड़ रुपये का राजस्व मिला है।
टेंट लगाकर कमाए 50 करोड़ रुपये
गढ़वाल मंडल विकास निगम को संजीवनी देने का काम भी यात्रा ने किया है। पिछले यात्राकाल में निगम ने केदारनाथ यात्रियों के प्रवास के लिए धाम में टेंट लगाकर 50 करोड़ रुपये से अधिक कमाए हैं। यात्रा मार्ग पर स्थित निगम के पर्यटक आवास गृहों से भी अच्छा व्यवसाय मिला है।
यात्रा पर जाने के लिए जरूरी सलाह
- चारोंधाम हिमालयी क्षेत्र में स्थित हैं, ऑक्सीजन लेबल भी कम होता है, इसलिए स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही कदम बढ़ाएं।
- सरकार की ओर से भी स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की गई है। ब्लड प्रेशर, शुगर और हृदय रोग से पीड़ित लोग ज्यादा सावधानी बरतें। डॉक्टरी परामर्श के बाद ही यात्रा पर जाने का फैसला करें।
- यात्रा के दौरान जरूरी जीवन रक्षक दवाइयां साथ लेकर जाएं। जुकाम बुखार, सिरदर्द आदि की दवाइयां भी साथ में रखें।
- यात्रा मार्ग में खानपान का खास ध्यान रखें। ताजे भोजन का सेवन करें।
- उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम पल-पल बदलता है। इसलिए ऊनी वस्त्र, कंबल, वाटरप्रूफ बिस्तर, बरसाती, छाता, टार्च आदि आवश्यक साथ में रखें।
चारधाम यात्रा की चुनौतियां
चारधाम यात्रा में मौसम सबसे बड़ी चुनौती है। मौसम खराब होने पर यात्रा रोकनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना बड़ी चुनौती होता है। यात्रियों की संख्या बढ़ने से अब सरकार को व्यापक इंतजाम करने पड़े हैं।
बारिश होने पर यात्रा रूट पर भूस्खलन जोन रोड़ा बनते हैं। यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ यात्रा मार्ग में सरकार और बीआरओ के प्रयासों के बावजूद कई भूस्खलन जोन मुसीबत बने हुए हैं। हालांकि, बारिश होने पर यहां सरकार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य को भेजती है।
हिमालय क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में मानव गतिविधियां बढ़ने से यहां पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। इस बार हालांकि प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, लेकिन फिर भी यहां पर्यावरण को बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
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प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। पर्वतीय जिलों में कई स्थानों पर क्रैश बैरियर नहीं होने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। मार्गों के संकरा व घुमावदार होने से कई बार चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठते हैं। इसे देखते हुए क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं।