साथ ही घायल व बीमार जानवरों के इलाज के लिए पशुपालन विभाग द्वारा पहली बार चार अस्थायी अस्पताल भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां पर सात पशु चिकित्सक तैनात हैं। यही कारण है कि बीते वर्ष की तुलना में इस बार जानवरों की मौत का आंकड़ा भी कम है। अभी तक 90 घोड़ा-खच्चरों की मौत हुई है। दूसरी तरफ अब, केदारघाटी से लेकर केदारनाथ में हो रही बारिश के चलते पैदल मार्ग पर फिसलन बढ़ने के कारण 2500 घोड़ा-खच्चर संचालक अपने जानवरों के साथ वापस लौट चुके हैं।
आने वाले दिनों में और पशु संचालकों के भी यात्रा से लौटने की उम्मीद है। केदारनाथ यात्रा प्रीपेड काउंटर संचालन कर रही जी-मैक्स कंपनी के प्रभारी खुशाल सिंह नेगी ने बताया कि अभी तक घोड़ा-खच्चरों से 3 लाख 16 हजार 450 यात्री धाम पहुंच चुके हैं। इधर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. अशोक कुमार ने बताया कि घोड़ा-खच्चरों की नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है।