सरकार ने 25 जून की कैबिनेट बैठक में सीमित रूप में तीन जिलों के लिए चारधाम यात्रा शुरू करने का फैसला किया था। इसके तहत चमोली जिले के लोगों को बदरीनाथ धाम दर्शन करने, रुद्रप्रयाग जिले के लोगों को केदारनाथ धाम और उत्तरकाशी के लोगों को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के दर्शन की अनुमति दी गई थी। इसके साथ ही सरकार 11 जुलाई से यात्रा के दूसरे चरण में बाकी प्रदेशवासियों के लिए चारधाम यात्रा खोलने की तैयारी में थी। सोमवार को हाईकोर्ट ने यात्रा संबंधी कैबिनेट के फैसले पर रोक लगा दी।
अदालत ने मौके दिए, कमियां दूर नहीं कर पाई सरकार : अभिजय
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने यात्रा पर रोक के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक जुलाई से चारधाम यात्रा के सरकार के फैसले पर रोक लगाने के सिवाय हाइकोर्ट के पास कोई विकल्प ही नहीं बचा था क्योंकि कोर्ट ने अधिकारियों को अनेक बार कमियां दूर करने के मौके दिए लेकिन सरकार इन्हें दूर नहीं कर पाई।
जगन्नाथ यात्रा की तरह हो पूजा का सजीव प्रसारण
हाईकोर्ट ने कहा कि उसे श्रद्धालुओं की भावना का पूरा अहसास है और सरकार चारों धामों की पूजा का टीवी पर सजीव प्रसारण करे। सरकार की ओर से इस पर आपत्ति करते हुए कहा गया कि यह शास्त्र सम्मत नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब शास्त्र लिखे गए तब टीवी होता नहीं था तो ये व्यवस्था कैसे दी जा सकती थी। कोर्ट ने कहा कि जैसे उड़ीसा में जगन्नाथ यात्रा के सजीव प्रसारण की व्यवस्था है वैसा ही प्रबंध यहां भी किया जाए।
देश रक्षा के लिए दी जा सकती है राज्य की कुर्बानी
हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से चारधाम के पुजारियों और अन्य लोगों की यात्रा संबंधी मांग के तर्क पर टिप्पणी की कि ऐसे लोगों को उन परिवारों से मिलाया जाए जिन्होंने परिजनों को महामारी में खोया है। कोर्ट ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की रक्षा के लिए राज्य की कुर्बानी देनी पड़े तो यह उचित है।