20 सितंबर को सूरत से उत्तराखंड चारधाम पर निकला 114 श्रद्धालुओं का जत्था गंगोत्री व यमुनोत्री के दर्शन कर चुका है। बीते 26 सितंबर को तीन बसों में सवार ये श्रद्धालु ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे से केदारनाथ के लिए निकले। लेकिन रुद्रप्रयाग जिले की सीमा पर सिरोहबगड़ बैरियर से उन्हें ई-पास के अभाव में पुलिस ने बैरंग लौटा दिया। यात्री दल में शामिल सुमित पटेल, जयेश वघेल, कुनाल पटेल, भावेश रेटीवाला आदि ने बताया कि उन्होंने प्रशासन व पुलिस ने काफी गुहार भी लगाई, लेकिन बेअसर रही। दो दिन से श्रीकोट होटल में रुके हुए हैं।
उनके पास कोविड-19 वैक्सीनेशन के प्रमाण पत्र सहित अन्य पहचान से जुड़े प्रमाण पत्र भी हैं। दल में 25 से अधिक बच्चे, 15 से अधिक बुजुर्ग शामिल हैं। ई-पास व सीमित यात्रियों की संख्या की व्यवस्था ने उनकी चारधाम यात्रा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से दर्शन की अनुमति देने की मांग की है। इधर, रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बताया कि शासन व देवस्थानम बोर्ड द्वारा जारी एसओपी के तहत यात्रा संचालित हो रही है। मैनुअल पास के लिए पहले से यात्रियों की लंबी कतार है। ऐसे में आ रहे नए यात्रियों की मदद संभव नहीं है।
बिना दर्शन के लौटे चुके दो हजार से अधिक यात्री
उत्तराखंड सरकार की ई-पास व्यवस्था व सीमिति यात्रियों की संख्या के कारण बीते एक सप्ताह में केदारनाथ दर्शन की चाह लेकर लगभग दो हजार यात्री सिरोहबगड़ से वापस लौट चुके हैं। महराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, यूपी सहित अन्य कई राज्यों से पहुंचे इन यात्रियों के ई-पास या तो गलत थे, या किन्हीं कारणों से बन पाए थे। पुलिस से मिली सूचना के अनुसार यात्रा के चार दिनों में ही 700 से अधिक यात्रियों को ई-पास गलत होने के कारण बैरंग भेज दिया गया था।