चारधाम यात्रा के लिए जारी राज्य सरकार की एसओपी आस्था पर भारी पड़ रही है। यात्रा के लिए पहले धाम यमुनोत्री में एक दिन में 400 तीर्थयात्रियों के दर्शन पूजन की अनुमति है, जो चारों धामों में से सबसे कम है। जिससे तीर्थयात्रियों को पंजीकरण के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। यमुनोत्री धाम के दर्शन में ही दो से तीन दिन का समय लग रहा है।
कोरोना महामारी के कारण चारधाम यात्रा प्रतिबंधित थी। बाद में न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया और सरकार को कोविड 19 का ध्यान रखते हुए 16 सितंबर को यात्रा शुरू करने को आदेश जारी किया, जिस पर सरकार ने एसओपी जारी कर ई-पास के साथ अलग- अलग धामों के लिए तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित कर दी। जो कि विभिन्न क्षेत्रों से आ रहे श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बनता जा है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि सरकार अपने नियमों पर खरी न उतरने से हमें मानसिक तनाव के साथ समय, आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। एक ही धाम में दो तीन दिन लग रहे हैं। यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आए राजा मजूमदार, सुधाकर, मोना चौधरी, श्रीकुमार चटर्जी, विजयदास आदि ने कहा कि यमुनोत्री जाने से रोका जा रहा है, जब पहले ही धाम में यह हालत है तो अन्य तीन धामों में क्या होगा।
इधर, होटल व्यवसायी विशालमणी रतूड़ी, पुरोहित समाज के पुरुषोत्तम उनियाल, पवन उनियाल, अनोज, आशुतोष आदि का कहना है कि ऐसी यात्रा खोलकर कोई फायदा नहीं है। इससे तीर्थयात्री परेशान हो रहे हैं। एसडीएम शालिनी नेगी का कहना है कि तीर्थयात्रियों की सीमित संख्या न्यायालय की ओर से ही तय की गई है। नियमों से बंधे होने के चलते ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता है। तीर्थयात्रियों की समस्याओं से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।