साल 2019 में 42 लाख 56 हजार तीर्थयात्री चारधाम यात्रा के लिए आए थे। इसमें हेमकुंड साहिब और पिरान कलियर के यात्री भी शामिल थे। वर्ष 2013 में दैवीय आपदा के बाद से चारधाम यात्रा पूरी तरह से पटरी से उतर गई थी। उसके बाद राज्य सरकार के प्रयास और यात्रियों की अगाध आस्था के बल से चारधाम यात्रा ने अपनी पुरानी गति पकड़ी थी।
18 फीसदी की दर से बढ़े हैं यात्री
एक अनुमान के अनुसार, प्रदेश में सालाना करीब 18 फीसदी की दर से यात्रियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। लेकिन आशंका यह है कि कहीं समूचे विश्व के लिए चुनौती बनी कोरोना महामारी का संकट यात्रियों की वृद्धि दर पर ब्रेक न लगा दे।
तीर्थ स्थल यात्रियों की संख्या
गंगोत्री 5,30,334
यमुनोत्री 4,65,534
केदारनाथ 10,00021
बदरीनाथ 12,44,993
हेमकुंड साहिब 2,40,133
पिरान कलियर 7,75000
कुल 42,56,015
कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार बदरीनाथ धाम के रावल और अन्य लोगों को सेल्फ क्वारंटीन में रहना पड़ सकता है। रावल इस समय केरल में बताए जा रहे हैं और लॉकडाउन खुलते ही उन्हें बुलाया जा सकता है।
वह कपाट खुलने के समय बदरीनाथ पहुंचेंगे। इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए चार धाम यात्रा से जुड़ा प्रबंधक वर्ग यह कतई नहीं चाहता कि किसी तरह की अप्रिय स्थिति का सामना बाद में करना पड़े।
ऐसे में रावल को जल्दी बुलाने और उन्हें चमोली या जोशीमठ में 14 दिन के लिए क्वारंटीन करने पर भी विचार किया जा रहा है। चार धाम विकास परिषद के एक पदाधिकारी के मुताबिक चार धाम की परंपराओं के निर्वहन के दौरान भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।