सुरंग के उत्तर और दक्षिण पोर्टल्स से मिलाने का कार्य, कोविड-19 की चुनौतियों एवं राष्ट्रव्यापी तालाबंदी के कारण प्रतिबंधों के बीच पूरा किया गया। भूमि अधिग्रहण, कमजोर भूविज्ञान, निरंतर जल निकासी एवं सुरंग के ऊपर घना निर्मित क्षेत्र होने के कारण नीचे बैठने की संभावना के मद्देनजर सुरंग का निर्माण चुनौतीपूर्ण कार्य था।
सीमा सड़क संगठन ने जनवरी 2019 में सुरंग के उत्तर पोर्टल पर काम शुरू किया था, लेकिन दक्षिण पोर्टल पर काम राज्य सरकार के सक्रिय समर्थन से सुरंग के ऊपर भूमि मुआवजा और मकानों की सुरक्षा के मुद्दों का समाधान करने के बाद अक्तूबर 2019 के बाद शुरू हो सका। इस सुरंग की सफलता से यातायात को गति देने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि चंबा सुरंग के निर्माण में नवीनतम ऑस्ट्रेलियाई तकनीक का उपयोग किया गया है।
मैसर्स भारत कंस्ट्रक्शन, देहरादून द्वारा प्रदान की गई आधुनिक तकनीक और मशीनों के उपयोग के साथ-साथ समय-समय पर हुए नुकसान की भरपाई दिन और रात की पाली में कार्य करके की गई। सुरंग जनवरी 2021 में पूरा होने की निर्धारित तिथि से लगभग तीन महीने पहले अक्तूबर 2020 तक यातायात के लिए तैयार हो जाएगी।
87 करोड़ की लागत से किया जा रहा सुरंग का निर्माण
सीमा सड़क संगठन के चीफ इंजीनियर आशु सिंह राठौर ने बताया कि 4.2 किमी सड़क और 440 मीटर सुरंग का निर्माण 87 करोड़ की लागत से किया जा रहा है । लगभग 12,000 करोड़ रूपये की लागत वाली प्रतिष्ठित चारधाम परियोजा ना के तहत, सीमा सड़क संगठन 249 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कर रहा है, जो गंगोत्री और बदरीनाथ के पवित्र मंदिरों की ओर जाता है।
अधिकतर कार्य निर्धारित समापन तिथि से आगे प्रगतिशील है और अक्तूबर 2020 तक पूरा किया जाना है। उन्होंने बताया कि चारधाम परियोजना के अंतर्गत बीआरओ के पास कुल 11 परियोजनाएं हैं, इनमें से पांच परियोजनाओं को अक्तूबर 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।