सुरंग बनने से जिला मुख्यालय में केदारनाथ तिराहा, बेलणी पुल और मुख्य बाजार में आए दिन लगने वाले जाम से हमेशा के लिए निजात मिलेगी। वहीं, नदी के दोनों तरफ बसे गांवों के लोगों की हाईवे तक पहुंच भी आसान हो जाएगी। दक्षिण कोरिया की योग्मा इंजीनियरिंग और भारत की फीडबैक इंट्रा कंपनी ने दो साल पहले सुरंग निर्माण को संयुक्त रूप से बोर होल सर्वे किया था।
2008-09 में भेजा गया था प्रस्ताव
बीआरओ-66 आरसीसी गौचर ने रुद्रप्रयाग में आबादी क्षेत्र से बाहर बदरीनाथ और गौरीकुंड नेशनल हाईवे को लिंक करने को 2008-09 में सुरंग निर्माण का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। अध्ययन एवं विशेषज्ञों की राय के बाद केंद्र ने 2011-12 में सुरंग के सर्वे को मंजूरी दी। इसके बाद वर्ष 2015-16 में तीन चरणों में सर्वे पूरा किया गया।