सुप्रीम कोर्ट की ओर से उत्तराखंड में निर्माणाधीन ऑलवेदर रोड में चौड़ाई के मानकों में दी गई छूट के विषय में पर्यावरण सचेतक सुरेश भाई का कहना है कि पूर्व में कोर्ट ने गंगोत्री क्षेत्र में सात मीटर चौड़ाई के मानक तय किए थे। जिन्हें अब 10 मीटर कर दिया गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इन मानकों का अक्षरश: पालन किया जाएगा। क्योंकि अभी तक सरकारें पर्यावरण को न्याय नहीं दे पाई हैं। सुरेश भाई का कहना है कि गंगोत्री क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। वर्ष 2017 में उत्तराखंड सर्वोदय मंडल के प्रतिनिधिमंडल ने जिसमें राधा बहन भी शामिल थीं, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर सर्वे करने के बाद सड़क चौड़ीकरण के मुद्दे पर 24 पेज की अध्ययन रिपोर्ट सौंपी थी। उस दौरान सड़क की चौड़ाई गंगोत्री क्षेत्र में सात मीटर से अधिक न करने पर सहमती बनी थी।
उन्होंने कहा कि मध्य हिमालय का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। इस क्षेत्र में अब करीब सौ किमी लंबाई की सड़क का चौड़ीकरण किया जाना है। पूर्व में मानकों का पालन नहीं किया गया। कई जगह चौड़ीकरण के नाम पर 20 से 25 मीटर तक कटिंग की गई है। क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। सड़क का सर्वे करने पर स्पष्ट रूप से ठेकेदारी की मनमानी दिखाई देती है। इस मामले में रवि चोपड़ा कमेटी ने नियोजित विकास और पर्यावरण को बचाने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। अब हमें शंका है कि इस रिपोर्ट के पहलुओं को नजरअंदाज न कर दिया जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई नई कमेटी कामों पर नजर रखेगी और पुरानी कमेटी की सिफारिशों को लागू कराने का काम करेगी।
जनरल बिपिन रावत भी नहीं थे सड़क चौड़ीकरण के पक्ष में
पर्यावरण सचेतक सुरेश भाई ने बताया कि वर्ष 2018 में सीडीएस जनरल बिपिन रावत गंगोत्री धाम की यात्रा पर आए थे। उस दौरान उन्होंने भी माना था कि सुरक्षा के लिहाज से पर्यावरण से छेड़छाड़ कर सड़क चौड़ीकरण की जरूरत नहीं है। गंगोत्री क्षेत्र के पर्यावरण को बचाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। चारधाम परियोजना हाई पावर कमेटी के सदस्य डॉ. हेमंत ध्यानी का कहना है कि न्यायालय ने रक्षा मंत्रालय की याचिका में उठाई गई मांग को स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने सड़क के मानक को 5.5 मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर चौड़ा करने का निर्णय दिया है। इस लिहाज से परियोजना पुन: अपने मूल स्वरूप में बहाल हो जाएगी। जिसके चलते सभी पर्यावरणीय समस्याओं ने जन्म लिया था।