अपराध करने का तरीका
- ठग खुद को अधिकृत हेली सेवा प्रदाता या एजेंट बताकर फर्जी नंबर, फर्जी सोशल मीडिया पेज व फर्जी बेबसाइबट संचालित करते थे।
- सोशल मीडिया एवं मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रद्धालुओं को टारगेट किया जाता था।
- वीआईपी दर्शन, तुरंत कन्फर्म टिकट, सीमित सीट जैसे झूठे प्रलोभन देकर विश्वास में लिया जाता था।
- विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खाते खुलवाकर उन्हें म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
- ठगी की धनराशि इन खातों में ट्रांसफर कर एटीएम के माध्यम से निकासी की जाती थी।
- गिरोह के सदस्यों के बीच 15 से 25 प्रतिशत तक कमीशन का बंटवारा किया जाता था।
एनसीआरपी शिकायतों से जुड़े मिले बैंक खाते
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों पर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) में कई शिकायतें दर्ज मिलीं। व्हाट्सएप चैट्स से बैंक खाते, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड के आदान-प्रदान के प्रमाण भी मिले हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है और इसके अन्य सदस्य अभी फरार हैं।
श्रद्धालुओं को हेलिकॉप्टर बुकिंग केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही करना चाहिए। किसी भी अनजान लिंक, सोशल मीडिया पेज या व्हाट्सएप नंबर के झांसे में न आएं। साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
- अजय सिंह, एसएसपी, एसटीएफ