पुजारी द्वारा अराध्य का श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद उनकी अलग-अलग आरती कर भोग लगाया जाता है। रावल भीमाशंकर लिंग ने बताया कि भगवान भैरवनाथ से बाबा केदार की यात्रा के सकुशल संचालन व सुख-समृद्धि की मनौति मांगी जाती है। वे, पूरे क्षेत्र के क्षेत्रपाल हैं, इसलिए सर्वप्रथम उनका आह्वान किया जाता है।
यह है मान्यता
भगवान भैरवनाथ, बाबा केदार के क्षेत्रपाल के रूप में पूजे जाते हैं। मान्यता है कि अराध्य देवता केदारनाथ धाम की रक्षा करते हैं। श्रद्धालुओं को बाबा केदार के दर्शन का पुण्य तभी प्राप्त होता है, जब वे भगवान भैरवनाथ के दर्शन भी करते हैं। केदारनाथ में कपाटोद्घाटन से पहले शनिवार या मंगलवार को भगवान भैरवनाथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। उसके बाद ही बाबा केदार की सांयकालीन आरती शुरू होती है। यह परंपरा कपाट बंद होने के दौरान भी होती है।