दूसरी उत्साहित करने वाली बात यह है कि गंगा के पानी में देवप्रयाग से लेकर हरकी पैड़ी तक हानिकारक जीवाणु (कोलीफार्म बैक्टीरिया) भी काफी कम हुआ है। हरकी पैड़ी में इस जीवाणु की उपस्थिति मार्च 2020 में 26 प्रतिशत पाई गई थी जो घटकर 17 प्रतिशत रह गई है।
वहीं, लक्ष्मणझूला ऋषिकेश में कोलीफार्म बैक्टीरिया में करीब 47 प्रतिशत तक की कमी मिली है। बोर्ड का मानना है कि यहां अब पानी क्लास ए का है। इसका मतलब यह है कि यहां पानी को क्लोरीन के साथ पीने के उपयोग में लाया जा सकता है।