केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि में बदलाव करना इतना आसान नहीं है। कोरोना संक्रमण के बीच शासन स्तर पर कपाट खुलने की तिथि में बदलाव की बात कही गई थी, जिस पर सभी जरूरी लोगों की मौजूदगी के बाद तय तिथि पर ही कपाटोद्घाटन का निर्णय लिया गया, जिसका रावल ने भी परंपरा का सम्मान बताते हुए स्वागत किया।
इधर, पंचगाई एवं दूस्तूदार पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट का कहना है कि यदि किन्हीं परिस्थितियों में केदारनाथ के रावल कपाटोद्घाटन में उपलब्ध नहीं होते हैं, तब भी परंपरानुसार धाम के लिए नियुक्त शिष्य (मुख्य पुजारी) ही कपाटोद्घाटन करते हैं।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा बिना विचार-विमर्श के कपाट खोलने की तिथि में बदलाव की जो बात कही गई थी, वह उचित नहीं था। यह, सदियों से चली आ रही परंपराओं के विरूद्ध है।
इधर, केदारनाथ धाम के कपाट तय तिथि 29 अप्रैल को ही खोले जाने का तीर्थ पुरोहित समाज एवं हक-हकूकधारियों ने स्वागत किया है। केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला, महामंत्री कुबेरनाथ पोस्ती, आनंद सेमवाल, राजकुमार तिवारी, प्रदीप बगवाड़ी समेत अन्य लोगों ने कहा कि तय तिथि पर केदारनाथ के कपाट खोलना, स्वागत योग्य निर्णय है।
परिस्थितियों के नाम पर परंपरा के साथ छेड़छाड़ किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। अन्यथा, पावन पर्वों व धार्मिक अनुष्ठानों के लिए निर्धारित किए जाने वाले दिनों और भक्तों की आस्था का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।
केदारनाथ धाम के कपाट तय तिथि पर खोले जाएंगे, इस संबंध में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया है। परंपरा के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। मैं, स्वस्थ्य हूं और सैंपल भी लिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद शासन-प्रशासन के जो भी निर्देश होंगे, उसी के हिसाब से बाबा केदार की डोली के धाम प्रस्थान व अन्य धार्मिक परंपराओं के संपादन में प्रतिभाग कर पाऊंगा।
- भीमाशंकर लिंग, रावल केदारनाथ धाम