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गौरीकुंड हाईवे पर जगह-जगह गिर रहे पत्थर, डेंजर जोन सक्रिय, मलबा आने से 11 घंटे बंद रहा बदरीनाथ

Wed, 08 Jul 2020 06:27 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, चमोली/ रुद्रप्रयाग
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बदरीनाथ हाईवे - फोटो : amar ujala
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मंगलवार देर रात लामबगड़ में मलबा आने से बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया। इस पर करीब 11 घंटे बाद बुधवार सुबह आवाजाही शुरू हो सकी। वाहनों का आवागमन बंद होने से तीर्थयात्री हाईवे पर ही फंसे रहे।

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भूस्खलन क्षेत्र लामबगड़ पहले से ही नासूर बना है। अब बारिश शुरू होने से मुसीबत और बढ़ गई है। यहां मौके पर एनएच की ओर से जेसीबी तैनात की गई हैं, ताकि मलबा आते ही  तुरंत उसे हटाने का काम शुरू किया जा सके। लेकिन बारिश के दौरान मलबा हटाना जोखिम भरा होता है, ऐसे में मलबा हटाने के लिए बारिश बंद होने का इंतजार करना मजबूरी है। 

मंगलवार रात भी बारिश की वजह से मलबा हटाने में दिक्कत आई। ऐसे में बदरीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही अन्य लोगों के वाहन भी फंसे रहे। बुधवार सुबह आवाजाही सुचारू होने के बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली।

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बदरीनाथ व गौरीकुंड हाईवे अतिसंवेदनशील 

बरसात के कारण ऋषिकेश-बदरीनाथ और रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे अति संवेदनशील हो गए हैं। जगह-जगह पर पत्थर गिर रहे हैं। साथ ही पानी रिसने से कीचड़ हो रहा है, जिससे छोटे वाहनों के फंसने का खतरा बना हुआ है। हाईवे पर नए भूस्खलन जोन आने वाले दिनों में मुश्किलों का सबब बन सकते हैं। वहीं जखतोली बाईपास तक लगभग आधा किमी हिस्से पर कभी भी पहाड़ी पर लटके बोल्डर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

 ऑल वेदर रोड परियोजना में निर्माणाधीन बदरीनाथ राजामर्ग मानसून के सक्रिय होने से कई जगहों पर अति संवेदनशील हो गया है। राजमार्ग पर सिरोहबगड़, सम्राट होटल के समीप, रैंतोली, तिलणी के समीप, नारायणघाटी और घोलतीर कस्बे से पहले डेंजर जोन पर पहाड़ी से कई बार पत्थर गिर रहे हैं। साथ ही इन स्थानों पर बरसाती पानी रिसने से कीचड़ भी हो रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। दूसरी तरफ रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे शुरू से ही खतरनाक हो गया है। सुरंग के दूसरे छोर से लेकर जखतोली बाईपास तक लगभग आधा किमी हिस्से पर कभी भी पहाड़ी पर लटके बोल्डर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

इसके अलावा हाईवे पर भटवाड़ी, लीसा फैक्ट्री, गंगतल महादेव, सिल्ली के समीप, सौड़ी, बांसवाड़ा, सेमी-भैंसारी, नारायणकोटी, डोलिया मंदिर, चंडिकाधार भूस्खलन जोन सक्रिय होने लगे हैं। बांसवाड़ा में हल्की बरसात में भी पहाड़ी से मलबा व पत्थर गिरने से आए दिन यातायात प्रभावित हो रहा है। एनएच के ईई जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मानसून सीजन को देखते हुए डेंजर जोन पर भूस्खलन से यातायात कम से कम बाधित हो, इसके लिए चिहिृृत स्थानों पर मशीनें तैनात कर दी गई हैं। साथ ही पूरे हाईवे की नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है।

पांचवें दिन भी अवरुद्ध रहा यमुनोत्री हाईवे 

विगत दिनों भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हुए यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को पांचवें दिन भी यातायात सुचारू नहीं हो सका है। संपर्क कटने के बाद से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण स्थानीय ग्रामीणों को जोखिम भरी आवाजाही करनी पड़ रही है। जिसको लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने रोष व्यक्त किया है। वहीं युद्धस्तर पर कार्य कर रहे एनएच विभाग ने बृहस्पतिवार तक हाईवे को सुचारू करने का भरोसा दिया है।

बता दें कि बीते 4 जुलाई की रात को जर्झरगाड़ में आए उफान से यमुनोत्री हाईवे का करीब 10 मीटर हिस्सा तबाह हो गया था। जिसके चलते अभी तक यमुनोत्री धाम सहित करीब एक दर्जन गांवों का बड़कोट तहसील से संपर्क कटा हुआ है। जोखिम भरे हालातों को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तीर्थयात्रियों के यमुनोत्री धाम जाने पर रोक लगायी हुई है। हालांकि रोजमर्रा के जरूरी कार्यों के लिए स्थानीय ग्रामीण अभी भी क्षतिग्रस्त हिस्से से पैदल आवाजाही कर रहे हैं। लेकिन इस स्थान पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था या सुरक्षा कर्मी तैनात नहीं होने से दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।

जिसको लेकर ब्लॉक प्रमुख सरोज पंवार, क्षेत्र पंचायत सदस्य अरविंद रावत, महावीर पंवार, अजबीन पंवार, जसपाल परमार आदि ने रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि हाईवे बाधित होने के बाद फंसे यात्रियों को निकालने के लिए पुलिस व एसडीआरएफ की टीम तत्काल पहुंच गई थी। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कोई मदद प्रदान नहीं की जा रही है। ऐसे में अगर इस लापरवाही के कारण उक्त स्थान पर कोई भी हादसा हुआ तो पुलिस व एनएच विभाग जिम्मेदार होगा।

वहीं स्यानाचट्टी चौकी प्रभारी कांतिराम जोशी ने बताया कि सुरक्षा के दृष्टिगत तीर्थयात्रियों को फिलहाल रोका गया है। स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद हैं। एनएच के अधिशासी अभियंता नवनीत पांडे ने बताया कि प्रभावित हिस्से में सीमेंट के स्कबर डालकर पहाड़ी की ओर कटान किया जा रहा है। अगर मौसम ने साथ दिया तो संभवत: बृहस्पतिवार को वाहनों की आवाजाही सुचारू कर दी जाएगी।
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थराली-जूनीधार-गोठिंडा सड़क का एक किमी हिस्सा धंसा

बरसात शुरू होते ही लोगों की मुसीबतें बढ़ने लगी हैं। थराली-जूनीधार-गोठिंडा सड़क का एक किलोमीटर हिस्सा धंसने से आवागमन बंद हो गया है। साथ ही एक दर्जन सड़कों पर जगह-जगह मलबा पत्थर गिरने से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। यहां लोगों को कई स्थानों पर पैदल चलना पड़ रहा है।

थराली-देवाल-मुंदोली सड़क सात स्थानों पर मलबा आने और चट्टान गिरने से बंद हो गई है। हाट-बेराधार, देवाल-सवाड़ सहित कई ग्रामीण सड़कें भी बंद हैं। खंपाधार-चिड़िगा मल्ला मार्ग मलबा आने से बंद है। वहीं पीएमजीएसवाई की थराली-पार्था, थराली-सगवाड़ा-कुराड़, कुनारबैंड घेस, थराली, किमनी, सेरा विजयपुर-तलवाड़ी सहित 10 से अधिक सड़कें मलबा आने से बंद हैं। 

वहीं देवाल-थराली सड़क बुधवार को लोनिवि ने आखिरकार खोल दी। गढ़वाल व कुमाऊं को जाने वाले टैक्सी, ट्रक यहां फंसे हुए थे। सड़क खुलने पर सभी वाहन गंतव्य को रवाना हुए। वहीं हाटकल्याणी-जैनबिष्ट सड़क कलसीरी के पास पुश्ता गिरने से बंद हो गई है। सड़कें बंद होने से कई गांवों में आवश्यक सामग्री नहीं पहुंच रही है। पीएमजीएसवाई के जेई प्रदीप पंवार ने बताया कि कलसीरी, घेस व सवाड़ रोड के क्षतिग्रस्त पुश्ता बनाने का काम एक-दो दिन में शुरू किया जाएगा।

सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी लगी हैं। थराली-जूनीधार-गोठिंडा मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क ध्वस्त हो चुकी है जिसका इस्टीमेट तैयार कर भेजा जा रहा है।
- मूलचंद गुप्ता, अधिशासी अभियंता, लोनिवि थराली।
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