वहीं इसके साथ ही मां यमुना की डोली को खरसाली गांव से यमुनोत्री धाम के लिए विदा किया गया। मंदिर समिति के प्रवक्ता बागेश्वर उनियाल ने बताया कि विशेष धार्मिक अनुष्ठान के बाद सुबह 9 बजे मां यमुना की मूर्ति को यमुना मंदिर से बाहर निकाला गया।
इसके बाद शनि देवता की अगुवाई में सभी श्रद्धालु मां यमुना की डोली को लेकर यमुनोत्री धाम पहुंची, जहां विशेष पूजा अर्चना के बाद दोपहर 1:15 बजे के शुभ मुहूर्त में मंदिर के कपाट खोल दिए गए।
वहीं हैदराबाद से चारधाम यात्रा पर आए 60 वर्षीय वी विरेशम की जानकीचट्टी स्थित होटल में मौत होने की सूचना है। परिजन उन्हें बड़कोट अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना किया है। पुलिस के अनुसार तीर्थयात्री की मौत संभवत हार्ट अटैक से हुई है। पोस्टमार्टम नहीं होने से मौत के कारणों का सही पता नहीं चल सका।
बदरीनाथ धाम के कपाटोद्घाटन की तिथि करीब आते ही तीर्थयात्री धाम पहुंचने लगे हैं। दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश के तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम पहुंचने लगे हैं। तीर्थयात्रियों ने सोमवार को सुबह तप्तकुंड में स्नान कर बदरीनाथ के सिंहद्वार पर मत्था टेका।
बदरीनाथ धाम के कपाट अभी बंद हैं, लिहाजा तीर्थयात्री अभी सिंहद्वार से आगे नहीं जा सकते हैं। धाम में इन दिनों मौसम सुहावना बना हुआ है। सुबह और शाम को यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकारी और कर्मचारीगण यात्रा तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
बदरीनाथ के बस स्टैंड, विजयलक्ष्मी चौक और मुख्य बाजार में अधिकांश दुकानें खुल गई हैं। व्यवसायी अपनी दुकानों को सजाने में लगे हुए हैं। यात्रा पड़ाव पीपलकोटी, जोशीमठ, चमोली, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, गौचर, गोविंदघाट और पांडुकेश्वर में भी चहल-पहल शुरू हो गई है।
संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति ऋषिकेश के तत्वाधान में आज चार धाम यात्रा शुभ मुहूर्त पर विभिन्न राज्यों से आए हुए यात्रियों से भरी हुई बसों को उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल , नगर निगम ऋषिकेश महापौर अनीता ममगाई एवं मुख्यमंत्री के विशेषकार्य अधिकारी धीरेंद्र सिंह पaवार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर आईएसबीटी यात्रा बस अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर अग्रवाल ने कहा है कि देवभूमि उत्तराखंड श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार है l उन्होंने कहा है कि देवभूमि उत्तराखंड ने हमेशा आने वाले श्रद्धालुओं को देवतुल्य माना है l यात्रियों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी। स्वच्छ पर्यावरण , सुंदर प्राकृतिक दृश्य यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करेंगे। उत्तराखंड प्रकृति का अपार भंडार है। यहां आकर श्रद्धालु तीर्थाटन के साथ-साथ पर्यटन का भी आनंद ले सकते हैं l जिस भरोसे के साथ विभिन्न राज्यों से यात्रीगण यहां पधार रहे हैं। उत्तराखंड वासियों का कर्तव्य बनता है कि अच्छे व्यवहार एवं भरोसे के साथ यात्रियों को सहयोग करें l जिससे निर्भय होकर सुरक्षित माहौल में श्रद्धालुगण यहां आए और दर्शन कर सकुशल वापस लौटे l