वक्त के साथ रेडियो तकनीक में बदलाव हुए हैं। एफएम ने रेडियो को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। अब डिजिटल रेडियो एकदम नए ढंग से श्रोताओं के बीच उपलब्ध है। शनिवार को विश्व रेडियो दिवस पर उत्तरांचल विवि के मास कम्युनिकेशन विभाग में आयोजित गेस्ट लेक्चर में वक्ताओं ने यह बात कही।
मुख्य अतिथि सूचना विभाग के फील्ड पब्लिसिटी अफसर अनिल दत्त शर्मा ने कहा कि रेडियो पिछले कई दशकों से संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। बीच में एक समय ऐसा भी आया, जब रेडियो का इस्तेमाल काफी कम हो गया। लेकिन एफएम और डिजिटल रेडियो आने के बाद यह एक बार फिर लोकप्रिय हुआ है। साथ ही इसमें रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। इसके लिए भाषा पर मजबूत पकड़, स्पष्ट उच्चारण, बोलने की कलात्मक शैली, खबरों की समझ बेहद जरूरी है।
उन्होंने छात्रों के प्रश्नों के जवाब भी दिए। मास कम्युनिकेशन के विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिन्हा ने कहा कि वेब आधारित पत्रकारिता का बहुत तेजी से विकास हुआ है, जिसके चलते रेडियो के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि रेडियो में चेहरा नहीं बल्कि आवाज महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का संचालन स्मृति उनियाल, पवन डबराल और वेद प्रकाश ने किया।