मौसम में हो रहे बदलाव की वजह से स्थानीय उत्पादकता, जलवायु और जनजीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, इसकी वजह से पलायन भी बढ़ रहा है।
समय रहते ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो एक दिन पहाड़ वीरान हो जाएंगे। पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने यह चिंता इंदिरा नगर स्थित हिमालयन एक्शन रिसर्च सेंटर में हुए एक सेमीनार में जताई।
मंगलवार को इंदिरा नगर स्थित हिमालयन एक्शन रिसर्च सेंटर में पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से पहाड़ पर पैदा हो रहे प्राकृतिक संकट और लगातार इससे उबरने को चलाई जा रही मुहिम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पहाड़ में असुविधाओं और असिंचित भूमि और बिगड़ते पर्यावरण की वजह से पलायन हो रहा है।
ऐसी फसलों या उत्पादों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जो मूल्य में अधिक और भार में कम हों, जल्दी खराब होने वाली भी न हों। इसमें कुछ अभिनव प्रयोग एवं अनुसंधान की भी जरूरत है। हिमालयी क्षेत्र में आर्थिक विकास के केंद्र में पारिस्थितिकी विकास को रखा जाना चाहिए, ताकि प्राकृतिक संतुलन बना रहे।
इसके लिए राज्य सरकारों को विकास से जुड़े समस्त विभागों एवं अनुसंधान एवं तकनीकी विदों को साथ लेकर जल-जंगल-जमीन के संरक्षण के साथ उत्पादकता को प्रोत्साहित करने वाली प्रणाली विकसित करनी होगी। इस मौके पर भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।