सरकार उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम -1959) संशोधन विधेयक पारित कर व्यावसायिक भवन स्वामियों को बड़ी राहत देने जा रही है। इस विधेयक के पारित होने के बाद अब तमाम नगर निकाय व्यावसायिक भवन स्वामियों से सर्किल रेट के आधार पर गृह कर की वसूली नहीं कर सकेंगे। दो दिवसीय सत्र के दौरान सदन में लिए गए इस फैसले से राज्य के लाखों व्यावसायिक भवन स्वामियों को भारी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही वित्तीय संकट से जूझ रहे नगर निगमों की माली हालत सुधरने के पूरे आसार है।
कारपेट एरिया पर गृह कर
नगर निकायों की ओर से वर्तमान में व्यावसायिक भवन स्वामियों से सर्किल रेट के आधार पर गृह कर की वसूली की जा रही है। लेकिन सर्किल दरें बहुत अधिक होने की वजह से व्यावसायिक भवन स्वामी नगर निकायों को गृह कर नहीं जमा करा रहे हैं। लिहाजा, सरकार को अधिनियम में संशोधन करना पड़ा। सरकार ने जो विधेयक पारित कराया है इसके लागू होने के बाद अब सर्किल रेट की जगह कारपेट एरिया के आधार पर गृह कर की वसूली की जाएगी।
जो आवासीय भवनों की तुलना में दो गुना से लेकर पांच गुना तक हो सकती है। किस व्यावसायिक भवन पर कितना गुना टैक्स लगेगा, इसकी दरें तय करने के लिए सरकार बाद में नियमावली बनाएगी। इस विधेयक के पारित होने के बाद तमाम नगर निकायों को अब व्यावसायिक भवन स्वामियों में गृह कर वसूलने में आसानी होगी। कारण कि वर्तमान में टैक्स की दरें बहुत ऊंची होने की वजह से प्रदेश के ज्यादातर व्यावसायिक भवन स्वामी टैक्स नहीं जमा करा रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि प्रदेश भर के 92 नगर निकायों में से ज्यादातर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं और सरकार भी नगर निकायों की वित्तीय मदद के लिए कुछ खास नहीं कर रही है।