बुधवार रात हुए हादसे की भनक बृहस्पतिवार सुबह लगी। वक्त पर हादसे की जानकारी नहीं लगने से दो लोग सुबह से पहले ही दम तोड़ चुके थे। घायल देवेंद्र यादव ने होश में आने के बाद बताया कि रात को दुर्घटना के बाद शोर मचाकर बचाने की गुहार लगाई, लेकिन रात होने के कारण मदद नहीं मिल सकी। पूरी रात देवेंद्र खाई में ही पड़े रहे। अगर वक्त पर दुर्घटना का पता चलता तो शायद धर्मेंद्र और बब्लू को भी बचा लिया जाता।
पर्व के मौके पर पहले भी हो चुके हैं हादसे
धनतेरस से एक दिन पूर्व पाटी के धूनाघाट में खाई में कार गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। वैसे चंपावत जिले में पर्वों के आसपास पहले भी कई वाहन हादसे हो चुके हैं। 2008 में हरेला पर्व पर 17 जुलाई को अमरूबैंड में रोडवेज बस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई। दिवाली पर 2003 में सूखीढांग के पास हुए हादसे में दो लोगों की मौत हुई।
- 13 अक्तूबर-लोहाघाट के पास सेना के ट्रक की चपेट में आने से बाइक सवार युवक की मौत।
- 14 अक्तूबर -खोलका के पास कार खाई में गिरने से चालक की मौत।
- 25 अक्तूबर-मूलाकोट में कार के खाई में गिरने से चालक की मौत।
- 28 अक्तूबर-संतोला के पास कार के खाई में गिरने से पूर्व फौजी की मौत।
- 30 अक्तूबर-पाटी के पास कार खाई में गिरने से डेढ़ साल की बच्ची की मौत।
- 11 नवंबर - पाटी के धूनाघाट में कार खाई में गिरने से दो की मौत।