चमोली हादसे की दास्तां बयां करते दीपक
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पंचनामा की प्रक्रिया के दौरान ग्रामीणों ने मांग रखी कि मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा दिलाने और परिवार के सदस्य को नौकरी दिलाने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर लोगों ने कहा कि जब तक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को संचालित करने वाली कंपनी के अधिकारी आश्वासन नहीं देते तब तक वह शव को नहीं उठाएंगे। इसी को लेकर वहां पर हल्की गहमा गहमी होती रही।
प्लांट की अचानक बिजली ऑन हो गई और शॉर्ट सर्किट से एक धमाका हुआ और क्षणभर में सबकुछ तबाह हो गया। इस दौरान कई लोग करंट की चपेट में आ गए। जैसे-तैसे धक्का मारकर वहां पर दरवाजा खुलवाया। इस दौरान कुछ लोग भागते हुए जान बचाने के लिए अलकनंदा नदी में भी कूद गए।
तीन मिनट में हुआ सबकुछ तबाह
प्रत्यक्षदर्शी सुभाष खत्री ने बताया कि - सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर जैसे ही बिजली आई, तो लोग करंट की चपेट में आने लगे। 11 बजकर 29 मिनट पर बिजली चले गई। सिर्फ तीन मिनट में ही सबकुछ तबाह हो गया। जिसने भी प्लांट के प्लेटफार्म के बाद जाली वाले रास्ते में जाली पर टच किया, वह जमीन पर गिर कर झुलस गया और घायल हो गया।
पवन राठौर ने बताया कि प्लांट के बाहर लोहे के एंगल पर बिजली की चिंगारियां निकलने लगी और प्लांट के अंदर से धुंआ आने लगा। जिससे अफरा-तफरी मच गई। दीपक फरस्वाण ने बताया कि हादसे के चंद मिनट पहले वह प्लांट के बाहर आ गया था। वह कुछ दूरी पर ही पहुंचा था कि इधर-उधर से लोगों की चीख पुकार सुनाई दी। जिन लोगों को करंट लगा, वे चंद सेंकड में जमीन पर गिर गए। करंट से उनके शरीर बुरी तरह से झुलस गए।
तीन गांवों में नहीं जले चूल्हे, हादसे ने ग्रामीणों को झकझोरा
तीन गांव के 14 लोगों की मौत के बाद चमोली जनपद में गांव-गांव में मातम पसरा हुआ है। हरमनी, रांगतोली और पाडुली गांव में चूल्हे तक नहीं जले। हर कोई इस हादसे से स्तब्ध है।