- दशहरे पर हिमाचल के पश्मी मंदिर में तय हुई यात्रा की तिथि, श्रद्धालुओं में भारी उत्साह
- तीन दिसंबर को गर्भगृह से बाहर आएंगे देवता, द्राबिल, बायला, तीलूर खेड़ा और कांडोई में होगा रात्रि विश्राम
संवाद न्यूज एजेंसी
चकराता। समूचे जौनसार-बावर, रंवाई, जौनपुर और बंगाण क्षेत्र के आराध्य चालदा महासू देवता आगामी सात दिसंबर को चकराता तहसील के मशक गांव पहुंचेंगे। मंगलवार को दशहरे के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पश्मी मंदिर में देवता की इस प्रवास यात्रा की तिथि विधिवत निर्धारित कर दी गई। यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम तय होने से पूरे क्षेत्र के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और उल्लास का माहौल है।
चार भाई महासू देवता (शाठी बिल) के बजीर दीवान सिंह राणा ने बताया कि चालदा महासू देवता पिछले वर्ष दिसंबर माह से हिमाचल के पश्मी गांव में विराजमान हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, आगामी तीन दिसंबर को देवता पश्मी मंदिर के गर्भगृह से बाहर आएंगे और इसके साथ ही उनकी प्रवास यात्रा का शुभारंभ हो जाएगा। प्रवास के पहले दिन देवता का रात्रि विश्राम हिमाचल प्रदेश के ही द्राबिल क्षेत्र में होगा।
मशक गांव के सदर स्याणा फतेह सिंह चौहान और सदर स्याणा शमशेर सिंह चौहान ने बताया कि देवता की प्रवास यात्रा की तिथि तय होने से समूचे जौनसार-बावर और चार खत कंडमाण क्षेत्र में खुशी की लहर है। ग्रामीण देवता के आगमन की भव्य तैयारियों में पूरे उत्साह के साथ जुटे हुए हैं।
इन पड़ावों से होकर मशक पहुंचेगी देव डोली
दीवान सिंह राणा ने प्रवास यात्रा के पड़ावों की जानकारी देते हुए बताया कि चार दिसंबर को चालदा महासू देवता जौनसार-बावर के खत भरम स्थित बायला गांव पहुंचेंगे, जहां उनका रात्रि विश्राम होगा। इसके बाद पांच दिसंबर को देवता का पड़ाव तीलूर खेड़ा में रहेगा। छह दिसंबर को देवता कांडोई-भरम गांव में रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन सात दिसंबर को देवता मशक गांव पहुंचेंगे और यहां विशेष अनुष्ठान के बाद नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होंगे।