जाड़ी गांव में चालदा महाराज की पालकी के लिए दर्शन करने उमडे़े श्रद्धालु।
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कोटी कनासर गांव से निकली चालदा महासू महाराज की देव पालकी और छत्र शनिवार को अपने प्रवास चौथे दिन जाड़ी गांव से मोहना गांव के लिए निकली। पालकी के जाड़ी गांव से निकलते वक्त पूरा गांव महासू देवता के जयकारों से गूंज उठा और लोगों ने नम आंखों से महाराज चालदा महासू को विदाई दी। इस दौरान बीच में पड़ने वाले गांवों के हजारों श्रद्धालुओं ने चालदा महासू पालकी और छत्र का फूल और चावलों से स्वागत किया।
चालदा महासू देवता के 33 साल के लंबे समय के इंतजार के बाद मोहना खत के मोहना गांव स्थित नव निर्मित मंदिर में विराज रहे हैं। शनिवार देर रात तक चालदा महासू देवता के मोहना गांव के मंदिर में पहुंचने की सूचना थी। चार दिन की पद यात्रा के बाद चालदा महासू देवता खत मोहना के साथ-साथ आसपास के कई खतों के लोगों को जगह-जगह दर्शन देकर लोगों के सुख-दुख के साथी बने। देवता के प्रति लोगों की आस्था देखते ही बनती थी। आज चौथे दिन भी जाड़ी से मोहना गांव तक हजारों की संख्या में श्रद्धालुओ की भीड़ देव दर्शन के लिए लगी रही। 20 नवंबर की सुबह से जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र के ही नहीं बल्किहिमाचल प्रदेश तक माने जाने वाले देवों के देव इष्ट देव चालदा महाराज 33 साल के बाद जौनसार बाबर जनजातीय क्षेत्र के चकराता तहसील के मोहना गांव स्थित नव निर्माण मंदिर में प्रवेश के लिए कोटी कनासर गांव से रवाना हुए थे। जो 20 नवंबर को बुल्हाड, 21 को गोरछा और 22 की रात जाडी गांव पहुंचे। दोपहर करीब दो बजे देवता जाड़ी से मोहना गांव के लिए रवाना हुए। हजारों श्रद्धालुओं के साथ देवता का जगह-जगह स्वागत किया गया। रविवार को मोहन गांव के मंदिर में देवता हरियाली लेकर अपने देव स्थान पर बैठ जाएंगे। इस अवसर गांव का स्याणा महेंद्र सिंह, शमशेर सिंह, वजीर दीवान सिंह, देव माली मुन्ना बिजल्वाण, सुनील नौटियाल, श्याम सिंह, जगबीर सिंह, मदन लाल नौटियाल, भागीराम डोभाल, रोशनलाल, भगत सिंह, अनीत वर्मा, बलदेव चौहान आदि शामिल रहे।