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चैत्र नवरात्रि 2021: नवसंवत्सर पर श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी समेत अन्य घाटों पर किया स्नान, मंदिरों में लगी भीड़ 

Tue, 13 Apr 2021 12:09 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/हरिद्वार

सार

  • आज  नवरात्रि और नवसंवत्सर के मौके पर कुंभनगरी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी पर किया स्नान।
  • गढ़वाल और कुमाऊं के मंदिरों में भी श्रद्धालुाओं ने की पूजा अर्चना ।
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हरकी पैड़ी पर स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र  नवरात्रि की शुरुआत आज मंगलवार से हो गई है। वहीं, आज नवसंवत्सर की भी शुरूआत हो गई है। नवरात्रि और नवसंवत्सर के मौके पर कुंभनगरी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी पर स्नान किया। वहीं, आस पास के घाटों पर भी श्रद्धालुओं की खासी भीड़ नजर आई। राजधानी देहरादून समेत गढ़वाल और कुमाऊं के मंदिरों में भी श्रद्धालुाओं ने पूजा अर्चना की।

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इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
इस बार  नवरात्रि पूरे नौ दिन रहेंगे। ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु प्रसाद भट्ट ने बताया कि नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा का अधिक महत्व है। हर वर्ष जब भी नवरात्रि आते हैं, मां दुर्गा विभिन्न वाहन पर सवार होकर आती हैं। इस बार मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी। इस बार 21 अप्रैल को रामनवमी मनाई जाएगी। नवरात्रि का परायण 22 अप्रैल को होगा। इस बार  नवरात्रि में अमृत सिद्धि योग बन रहा है।

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नव संवत्सर आज से, मंगल ही राजा और मंत्री

कुंभ की पूर्व बेला में नव संवत्सर 2078 मंगलवार से प्रारंभ हो गया है। इस वर्ष का नाम राक्षस है। विक्रमी नववर्ष के राजा और मंत्री के दोनों पदों पर मंगल का अधिकार रहेगा। ज्योतिषिय दृष्टि से यह वर्ष काफी कठिनाइयों भरा रहेगा।

मान्यता है कि चैत्र मास शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन ही सूर्योदय के समय ब्रह्मा ने पृथ्वी की रचना की थी। यही मुख्य कारण है कि पंचांग अनुसार हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात प्रथम तिथि के साथ ही, हिंदू नव वर्ष का प्रारंभ भी होता है। 13 अप्रैल, मंगलवार से नव संवत्सर 2078 आरंभ हो जाएगा। 

आचार्य प्रियव्रत शर्मा के अनुसार इसी दिन गुड़ी पड़वा भी है। मंगलवार से प्रारंभ हो रही प्रतिपदा के कारण इस संवत का राजा क्रूर ग्रह मंगल होगा। मंगल दंगल भी कराता है और मंगल भी करता है। पंचांग की गणना से देखें तो इस बार 13 अप्रैल मंगलवार को राक्षस नाम संवत्सर का आरंभ हो रहा है। मंगलवार के दिन वर्ष का आरंभ होने से वर्ष के राजा मंगल होंगे। मंत्री का पद भी मंगल के पास रहेगा।
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पूर्व नेपाल नरेश और केंद्रीय मंत्री ने की पूजा-अर्चना

केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरिरी और पूर्व नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाहदेव ने चैत्र मास के प्रथम नवरात्र पर नीलधारा तट स्थित श्री दक्षिण काली मंदिर पहुंचे। जहां निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि के सानिध्य में पूजा की।  

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने कहा कि नवरात्रि में नौ दिनों तक मां के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करने से हमें एक नई ऊर्जा प्राप्त होती है। सिद्धपीठ श्री दक्षिण काली मंदिर में साक्षात रूप से विराजमान मां भगवती की आराधना करने से सहस्त्र गुणा पुण्यफल की प्राप्ति होती है। आनंद पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी बालकानंद गिरि ने कहा कि मां आदि शक्ति की ऊर्जा किसी एक स्वरूप में नहीं, बल्कि साधक की भक्ति में ही निहित है। केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि पतित पावनी मां गंगा का तट और मां काली का सानिध्य कृपा पात्र शिष्यों को ही प्राप्त होता है।

सभी को कन्याओं के संरक्षण व संवर्द्धन का संकल्प अवश्य लेना चाहिए, तभी नवरात्र व्रत की सार्थकता है। पूर्व नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाहदेव ने कहा कि संत महापुरुषों के तप बल से भारत का विश्व में विशेष स्थान है। इस मौके पर आचार्य मनीष जोशी, आचार्य पवन दत्त मिश्र, स्वामी अनुरागी, स्वामी अवंतकानंद ब्रह्मचारी, स्वामी कृष्णानंद ब्रह्मचारी, स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी, महंत नत्थीनंद गिरि, महंत मोनू गिरि आदि मौजूद रहे।
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