हरक सिंह रावत की पार्टी में हुई फायरिंग पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे नेताओं की पोल विस अध्यक्ष ने खोल दी।
गोविंद कुंजवाल ने तो साफगोई से माना कि गोली चैंपियन ने ही चलाई थी, लेकिन इसके बाद उन नेताओं पर सवाल खड़े हो गए हैं जिन्होंने घटना के बाद मामले पर चुप्पी साध ली थी। यहां तक कि घटना में घायल हुए कांग्रेस नेता विवेकानंद खंडूड़ी भी अब तक गोलमोल जवाब दे रहे थे।
पढ़ें, चैंपियन ने किया सरेंडर, जमानत भी मिली
कृषि मंत्री के घर हुई फायरिंग के बाद घायल खंडूड़ी को सीएमआई अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इसके बाद पुलिस ने काफी पूछताछ की, लेकिन भोज में शामिल मंत्री और विधायकों में से किसी ने चैंपियन के फायरिंग करने की बात नहीं स्वीकारी। इस बीच कुछ मंत्री और विधायकों के बयान तो विरोधाभासी रहे।
वहीं, पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति द्वारा फायरिंग करने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। मीडिया में नाम उछला तब जाकर पुलिस ने चैंपियन का नाम जांच में शामिल कर उनकी तलाश शुरू की। लेकिन शुक्रवार को कुंजवाल के बयान के बाद आखिर चैंपियन को सरेंडर करना ही पड़ा।
इससे पहले कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश भी गोली चलने की बात मान चुकी थीं। हालांकि, उन्होंने नाम नहीं खोला था। वहीं, चैंपियन का दावा था कि उन्होंने गोली नहीं चलाई, खंडूड़ी पटाखों की चोट से घायल हुए होंगे।
साक्ष्य छिपाने का अपराध
कृषि मंत्री के घर फायरिंग के मामले में लीपापोती और साक्ष्य छिपाने के मामले में मौके पर मौजूद विधायक, मंत्री और उनके निजी सुरक्षाकर्मी भी दोषी माने जा सकते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस राघव कहते हैं कि मामले में सब कुछ स्पष्ट होने के बावजूद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया, जबकि मंत्रियों के सुरक्षाकर्मी और खुद मंत्री सब कुछ जानते थे।
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