उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार भले ही पंडित जवाहर लाल नेहरू के आदर्शों पर चलने का दंभ भरती हो, लेकिन उसकी नौकरशाही नेहरू से जुड़े एतिहासिक स्थलों की घोर उपेक्षा की है।
ताजा मामला है देहरादून में सहस्रधारा रोड पर साल 1962 में बनाया गया लोक निर्माण विभाग का निरीक्षण भवन। करीब 53 साल के इस भवन से पंडित नेहरू से जुड़ी कई यादें हैं। इस वजह से इसका एतिहासिक महत्व है, लेकिन संभालने के बजाए इसे निजी हाथों में देने की तैयारी कर ली गई है।
जानकारी के अनुसार पर्यटन विभाग ने सहस्त्रधारा के लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन को पीपीपी मोड पर देने का प्रस्ताव दिया है। इस संबंध में जिला पर्यटन अधिकारी वाईके गंगवार ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता व सहायक पर्यटन अधिकारी को पत्र लिखा है।
पत्र में कहा गया है कि लोक निर्माण भवन के निरीक्षण भवन के फोटो, क्षेत्रफल, सर्किल रेट की जानकारी प्रदान की जाए। लोनिवि के अधिशासी अभियंता से भूमि संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराने का निवेदन भी किया गया है।
साथ ही उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अवस्थापना निदेशक को पत्र की प्रतिलिपि भेजी गई है। निदेशक अवस्थापना को उनके द्वारा भेजे गए पत्र के बाद की संबंधित दो लोगों को लिखे पत्र की सूचना दी गई है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता केके जैन का कहना है कि पर्यटन विभाग के प्रस्ताव के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। जैन ने कहा कि सहस्रधारा का निरीक्षण भवन धरोहर स्थल है। यहां पर कई बार पंडित नेहरू आए थे।
उनका कहना था कि इस बारे में समुचित जानकारी प्राप्त करने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा। दूसरी ओर, कई बार प्रयास करने पर भी क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी योगेंद्र कुमार गंगवार ने फोन नहीं रिसीव किया।
यहां की सुंदरता के कायल थे नेहरू
पंडित जवाहर लाल नेहरू जब भी दून आते थे वह सहस्त्रधारा रोड स्थित लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में ठहरते और विश्राम करते थे। यहां से दिखने वाली प्राकृतिक सुंदरता की वजह से नेहरू को यह विश्राम स्थल बहुत पसंद था। 26 मई 1964 को नेहरू सहस्त्रधारा आए थे।
उन्होंने परिवार के साथ गंधक के जल और नदी में स्नान किया था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के इसी निरीक्षण भवन में आराम और भोजन किया था। उनके साथ इंदिरा गांधी और उनके बच्चे भी थे।
वह तीन घंटे तक यहां रहे थे। यहां के निवासी बुजुर्ग दौलत सिंह नेगी को पंडित नेहरू की तमाम यात्राओं की यादें ताजा हैं। बुजुर्ग नेगी बताते हैं कि जवाहर लाल को सहस्त्रधारा बहुत पसंद था। वह लोगों से खुलकर मिला करते थे।