महानिदेशक रक्षा संपदा ने 13 माह के भीतर ही मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) गढ़ी कैंट को स्थानांतरित कर दिया है। अमूमन एक सीईओ का दो वर्ष का न्यूनतम कार्यकाल रहता है। महानिदेशालय ने सात भारतीय रक्षा संपदा सेवाएं कॉडर के अधिकारियों का तबादला किया है, जिसमें सुब्रत पाल भी शामिल हैं।
पाल बतौर रक्षा संपदा अधिकारी बंगलुरू तैनात होंगे। जबकि, बीकानेर के रक्षा संपदा अधिकारी जाकिर हुसैन को गढ़ी कैंट में एडिशनल सीईओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। गौरतलब है कि केहरी गांव में अवैध निर्माण से चर्चा में आए सीईओ की रक्षा मंत्री मनोहर परिकर के निर्देश पर जांच चल रही थी।
जुलाई 2015 में किया था ज्वाइन
पाल ने बतौर सीईओ गढ़ी कैंट जुलाई 2015 में ज्वाइन किया था। अप्रैल 2016 में केहरी गांव में यूपी के दर्जाधारी मंत्री साहब सिंह सैनी की पत्नी रीता सैनी के अवैध निर्माण का मामला प्रकाश में आया था। प्रकरण को लेकर स्थानीय लोगों ने कैंट बोर्ड पर कई आरोप लगाए। कैंट और एमडीडी के संयुक्त निरीक्षण में क्षेत्र गढ़ी कैंट बोर्ड का निकला, जबकि सीईओ ने अधिकार क्षेत्र में होने से इनकार कर दिया। लोगों ने इसकी शिकायत रक्षा मंत्रालय से की। इसके बाद मध्य कमान लखनऊ और रक्षा संपदा विभाग मेरठ ने राजस्व टीम के साथ दोबारा केहरी गांव में सर्वे किया।
इस दौरान स्पष्ट हुआ कि यह क्षेत्र कैंट बोर्ड का ही हिस्सा है। इस प्रकरण की भाजपा प्रदेश अजय भट्ट ने रक्षा मंत्री से सीबीआई जांच की मांग की थी। माना जा रहा है शिकायतों और भाजपा के पत्र का संज्ञान रक्षा मंत्रालय ने लिया। सख्त कदम उठाते हुए सीईओ सुब्रत पाल को न सिर्फ कैंट बोर्ड के सीईओ पद से हटाया गया, बल्कि उन्हें सीईओ की जगह अग्रिम आदेश तक के लिए बंगलूरू में अपर रक्षा संपदा अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।