फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड में फ्लोर टेस्ट की संभावना बढ़ी, केंद्र कर रहा विचार

Thu, 05 May 2016 03:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • - अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को दी यह जानकारी
  • - सरकार का पक्ष रखने के लिए मांगा शुक्रवार तक का वक्त
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अदालत की निगरानी में उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने की सलाह गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सरकार ने इस पर अपना पक्ष रखने के लिए शुक्रवार तक का वक्त मांगा है, जिसकी इजाजत सुप्रीम कोर्ट ने दे दी।
विज्ञापन


केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह की पीठ के समक्ष कहा कि उन्होंने बेहद ईमानदारी के साथ अदालत की सलाह को केंद्र सरकार के समक्ष रखा है और सरकार इस पर पूरी गंभीरता से विचार कर रही है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार शुक्रवार तक पीठ के समक्ष अपना पक्ष रख देगी। अटॉर्नी जनरल की दलीलों को स्वीकार करते हुए पीठ ने सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी। मालूम हो कि मंगलवार को पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या अदालत की देखरेख में उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट संभव है?
विज्ञापन

कांग्रेस के वकील ने कहा, कोई आपत्ति नहीं

पूर्व सीएम हरीश रावत की तरफ से कपिल सिब्बल मामले में वकील हैं। - फोटो : file photo
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर केंद्र सरकार अदालत की सलाह मान ले तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

पीठ ने उनकेबयान को रिकार्ड पर लेते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार हमारी सलाह मानती है तो यह लोकतंत्र को आगे ले जाने में सहायक होगा। पीठ ने सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए टालते हुए कहा कि अगर शुक्रवार तक अटॉर्नी जनरल सरकार की ओर से कोई निर्देश लेकर नहीं आते हैं तो इस मामले पर आगे की सुनवाई होगी।

पीठ ने एक बार फिर कहा कि इस मसले को संविधान पीठ के पास भेजा जा सकता है। पीठ का मानना था कि राष्ट्रपति शासन लगाने संबंधी अधिकतर मामले को संविधान पीठ के पास भेजा गया है।

फ्लोर टेस्ट में सफल हुए बिना नहीं होगी स्थापित रावत सरकार

सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने यह भी कहा कि अगर अदालत ने फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश भी दिया तो भी रावत सरकार स्वत: पुन: स्थापित नहीं होगी, जब तक फ्लोर टेस्ट में वह सफल न हो जाए। इस पर हरीश रावत की तरफ से सिब्बल और सिंघवी ने कहा कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट (शक्ति परीक्षण) होना है यानी रावत का विश्वास प्रस्ताव होना है न कि अविश्वास प्रस्ताव।

इस पर अटॉर्नी जनरल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि चूंकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है लिहाजा रावत खुद को मुख्यमंत्री की तरह पेश नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी स्थिति है कि दोनों दलों को फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा। जवाब में सिंघवी ने कहा कि शक्ति परीक्षण उस दल का नहीं हो सकता, तो सत्ता में नहीं है। विश्वास प्रस्ताव जिस व्यक्ति को प्राप्त करना है, वह मुख्यमंत्री है।

जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया क्या होगी, अदालत को इस पर शुक्रवार को निर्णय लेना चाहिए, जब इस मामले की सुनवाई होगी। पीठ ने यह भी इशारा किया उत्तराखंड में अगर फ्लोर टेस्ट हुआ तो वह वर्ष 2005 में हुए झारखंड मॉडल पर होगा।
विज्ञापन

फ्लोर टेस्ट ही है अंतिम समाधान: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट
मालूम हो कि उत्तराखंड में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है और सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की उस याचिका पर विस्तृत सुनवाई के लिए तैयार हो गया है जिसमें नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा राष्ट्रपति शासन हटाने के आदेश को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।

गत 27 अप्रैल को सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को जारी रखने का आदेश दिया था। साथ ही शीर्ष अदालत ने फ्लोर टेस्ट पर लगी रोक भी बरकरार रखी थी। पीठ ने इस मसले पर विस्तृत सुनवाई करने का निर्णय लेते हुए सात प्रश्न उठाए थे।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना एक दुर्लभ कार्रवाई है। अगर सरकार अल्पमत में हो तो फ्लोर टेस्ट ही अंतिम समाधान है। पीठ ने कहा था कि अगर हम राष्ट्रपति शासन को सही भी ठहराते हैं तो फ्लोर टेस्ट तो होगा ही।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें