केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में गंगा किनारे रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के सात कार्यों पर रोक लगा दी है। रोक का निर्णय राज्य सरकार की सिफारिश के आधार पर लिया गया है। ये कार्य केंद्र सरकार के उपक्रम सेंट्रल वॉटर एंड पॉवर कंसल्टेंट (वेबकास) के स्तर पर कराए जा रहे थे।
इन सात कार्यों में से पांच में वन भूमि की अड़चन थी, जिसके चलते इनके पूरा होने में लंबा वक्त लगना तय माना जा रहा था। एक जगह नेशनल हाईवे चौड़ीकरण का कार्य बाधक बना, तो दूसरे मामले में स्थल चयन को अनुपयुक्त माना गया। इन सभी जगह टेंडर प्रक्रिया काफी आगे बढ़ गई थी। केंद्र ने इसकी परवाह किए बगैर हरिद्वार, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिलों से संबंधित इन कार्यों को रोक दिया है।
अब इन जगहों पर ये काम नहीं होंगे। सिंचाई विभाग को इनकी जगह नए स्थान चिह्नित करने के लिए कहा गया है। रिवर फ्रंट डेवलपमेंट का यह कार्य नमामि गंगे प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसमें गंगा किनारे स्नान और शमशान घाटों समेत कई कार्य होने हैं। इन स्थितियों के बीच, अपने हिस्से के बाकी 28 कार्य वेबकास करता रहेगा।
इन जगहों पर लगा ब्रेक
जगह कारण
कांगड़ी-हरिद्वार वन भूमि
पीली पड़ाव वन भूमि
त्रिलोकपुरी वन भूमि
गुलर वन भूमि
फरासू नेशनल हाईवे चौड़ीकरण
रुद्रप्रयाग संगम वन भूमि
कौडियाला अनुपयुक्त स्थल चयन
ये हैं वेबकास के प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट संख्या लागत (करोड़ में)
हरिद्वार से यूपी बॉर्डर - 07 16.21
ऋषिकेश से देवप्रयाग- 10 22.11
देवप्रयाग से रुद्रप्रयाग- 18 50.26
सिंचाई विभाग के पास 118 करोड़ के काम
देहरादून। रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के काम को उत्तराखंड में दो हिस्सों में बांटा गया है। एक हिस्से में 88 करोड़ 58 लाख के काम केंद्र सरकार के उपक्रम वेबकास को दिए गए हैं, तो दूसरे हिस्से का काम सिंचाई विभाग के जिम्मे हैं। सिंचाई विभाग को भी रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के तहत 35 जगह पर स्नान और शमशान घाटों का निर्माण करना है। हालांकि वेबकास के मुकाबले इतने ही कार्यों के लिए सिंचाई विभाग को 118 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए हैं।
उमा-त्रिवेंद्र की मीटिंग में बन गई थी रूपरेखा
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इन सात कार्यों को रोके जाने की रूपरेखा तैयार हो गई थी। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के बीच मीटिंग में इस मामले में चर्चा हुई थी। सीएम ने तब इन स्थानों की जगह कनखल, खड़खड़ी, विष्णुप्रयाग, धरासूं, बडेथी, मातली संगम जैसे नाम सुझाए थे। नए स्थलों के चयन के लिए ये छह नाम अब सिंचाई विभाग के सामने है। उसे कुल सात स्थलों को चिह्नित करना है।
राज्य सरकार नमामि गंगे अभियान के तहत स्वीकृत सभी कार्यों को तेजी से पूरा करना चाहती है। इसके अलावा, इस बात पर भी फोकस है कि कोई काम गैरजरूरी न लगे। इसलिए सात स्थानों के काम को रोकने का राज्य सरकार का ही अनुरोध था। इसके आधार पर रोक लगा दी गई है। इसके स्थान पर सिंचाई विभाग सात नए स्थान चिह्नित करके देगा, जिस पर आगे की कार्रवाई होगी।
- अरविंद सिंह ह्यांकी, पेयजल सचिव