राज्य सरकार भले ही प्रदेश में इको टूरिज्म विकसित करने के लिए अपने लिहाज से खाका तैयार कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार ने हर जगह इको टूरिज्म की इजाजत न देने की मंशा जाहिर कर दी है। राज्य के उन्हीं लैंड स्कैप में सैलानियों को जाने का मौका मिलेगा, जहां केंद्र अनुमति देगा। इस संबंध में राज्य सरकार के प्रस्ताव को रोककर केंद्र ने पहले भारतीय वन्य जीव संस्थान से सर्वे कराने का निर्णय लिया है।
उत्तराखंड इको टूरिज्म कारपोरेशन के गठन पर राज्य कैबिनेट की मोहर लगने के बाद प्रदेश में इको टूरिज्म का खाका तैयार किया जा रहा है। कारपोरेशन के पदाधिकारियों के संबंध में भी शासनादेश जारी हो गया है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में खूबसूरत लैंड स्कैप तलाशे जा रहे हैं। अब तक 35 लैंडस्केप चिन्हित कर लिए गए हैं। दूर-दराज पर्वतीय क्षेत्रों के ये ऐसे स्थल हैं, जिनके संबंध में लोगों को अधिक जानकारी नहीं है।
शासन की सोच है कि नए स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर लाने से सैलानी इस तरफ आकर्षित होंगे। यहां के युवाओं को नेचर गाइड बनाने और क्षेत्रीय लोगों की आमदनी बढ़ाने के लिए उनके घरों में गेस्ट हाउस खोले जाने का भी निर्णय ले लिया गया, लेकिन राज्य के इस प्रस्ताव पर हरी झंडी देने के लिए केंद्र राजी नहीं है।
केंद्र का मानना है कि बिना सोचे-समझे हर लैंड स्केप को पर्यटन स्थल बनाने से वन्य जीव प्रभावित होंगे। लोगों की आवाजाही से इको सिस्टम भी प्रभावित होगा।
देश के प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक एके शुक्ला ने भी राज्य के प्रस्ताव पर यह बिंदु उठाया है। केंद्र ने इस संबंध में भारतीय वन्य जीव संस्थान से सर्वे कराने का निर्णय लिया है। निर्देश संस्थान को प्राप्त हो गया है। संस्थान की रिपोर्ट के बाद ही केंद्र स्थलों के संबंध में अनुमति देने का निर्णय लेगा।