हिमालय का डेटा बेस तैयार करने के लिए केंद्र सरकार ने पांच सौ करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इससे हिमालयी विविधता का अलग-अलग आंकड़ा तैयार हो सकेगा। डाटा बेस तैयार होने से हिमालय संरक्षण संबंधी परियोजनाएं चालू होगीं और शोध कार्य शुरू किए जाएंगे। विश्व भर के विज्ञानी इन्हीं आंकड़ों के आधार पर अगले शोधों की कार्ययोजना तैयार करेंगे। विश्व स्तरीय एजेंसियां यहां प्रोजेक्ट शुरू करेगीं।
हिमालय के विश्व पटल पर न आ पाने की मुख्य वजह यहां आंकड़ों की कमी रही है। हिमालय का वृहत पैमाने पर डाटा बेस तैयार नहीं किया गया जिसकी वजह से हिमालयी विविधताओं के संबंध में विश्व के देशों को कम जानकारी रही है। हिमालयी इको सिस्टम सर्विसेस का ढंग से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। पर्वतीय देशों के फोरम में अब तक हिमालय शामिल नहीं है।
मोरक्को कन्वेंशन के आधार पर बनेगा एक्शन प्लान
मोरक्को में हुई कन्वेंशन आफ पार्टीज-22 में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों ने हिमालय के संबंध में विश्व के देशों के साथ विभिन्न मसलों पर समझौते किए। इन्हीं के आधार पर हिमालय पर पड़े रहे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को न्यूनतम करने और इको सिस्टम सर्विसेस का सटीक आकलन करने के लिए एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा।
महानिदेशक वन एवं पर्यावरण डॉ. एसएस नेगी ने बताया कि पांच सौ करोड़ धनराशि हिमालय के लिए स्वीकृत कर दी गई है। इससे हिमालयी क्षेत्र में विभिन्न परियोजनाएं संचालित की जाएंगी।